
रूपेश कुमार
(चैनपुर बिहार)
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इश्क ही वो इश्क ही क्या,
जिसमें जीवन की ना रुसवाईया हो,
ना उसमें दर्द भरी तनहाईयाँ हो,
और ना नयनों मे आँशु की बरसात हो,
और ना उसमें तड़प हो ना गरज हो,
तो वो फिर इश्क ही क्या है!
इश्क ही वो इश्क ही क्या ,
जिसमें सातों जन्मों-जन्मों का स्वप्न ना हो,
जिसमें खुशियों की अंबार ना हो,
जिसमें तारों को तोड़कर लाने जैसी स्वप्न ना हो,
जिसमें रात को दिन और दिन को रात ना लगे,
तो वो फिर इश्क ही क्या है!
इश्क ही वो इश्क ही क्या,
जिसमें बिन दर्द का दर्द ना हो,
जिसमें बिन नींद का चैन ना हो,
जिसमें बिन रोग का रोगी ना हो,
जिसमें जाति-धर्म मिट ना जाएँ,
तो वो फिर इश्क ही क्या है !
इश्क मे अंधापन होना चाहिए,
ना जाति ना धर्म सिर्फ प्रेम का भूत हो,
जिसमें ना जिस्म की लालसा हो,
ना कुछ लेने का लोभ-लालच,
सिर्फ निस्वार्थ प्रेम की चाह हो,
असली इश्क तो वही है जो
मरकर भी अमर हो जाता है !
परिचय :- रूपेश कुमार
शिक्षा – स्नाकोतर भौतिकी, इसाई धर्म (डीपलोमा), ए.डी.सी.ए (कम्युटर), बी.एड (महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी बरेली यूपी) वर्तमान-प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी !
निवास – चैनपुर, सीवान बिहार
सचिव – राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्थान
प्रकाशित पुस्तक – मेरी कलम रो रही है
सम्मान : कुछ सहित्यिक संस्थान से सम्मान प्राप्त !
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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