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रचयिता : भारत भूषण पाठक
विधा :- मालिनी छन्द
विधान :- नगण नगण मगण यगण यगण
होत अलौकिक प्रकाश, जेल में
देख के कंस मन,हिय अकुलायो।
है ये कैसो प्रकाश जो ऐसो
ताहि के पार न देखि पायो।।
द्वार खुले अरू बेड़ी टूटे
चहुँओर देखो धुँध है छायो।
लेत वसुदेव जग तारण को।
यमुना जी में पाँव बढ़ायो।।
है ये कैसो भाग वसुदेव को।
घर में जो जगतारण आयो।
फूल गिरे अरू अम्बर से जो।
स्वयं हरि के ऊपर आयो।।
देख हरि को यमुना जी में
यमुना जी भी ऊपर धायो।
है यह कैसो भाग जो हमरो
आयो स्वयं नारायण आयो।।
देख के कंस मन,हिय अकुलायो।
है ये कैसो प्रकाश जो ऐसो
ताहि के पार न देखि पायो।।
द्वार खुले अरू बेड़ी टूटे
चहुँओर देखो धुँध है छायो।
लेत वसुदेव जग तारण को।
यमुना जी में पाँव बढ़ायो।।
है ये कैसो भाग वसुदेव को।
घर में जो जगतारण आयो।
फूल गिरे अरू अम्बर से जो।
स्वयं हरि के ऊपर आयो।।
देख हरि को यमुना जी में
यमुना जी भी ऊपर धायो।
है यह कैसो भाग जो हमरो
आयो स्वयं नारायण आयो।।
लेखक परिचय :-
नाम – भारत भूषण पाठक
लेखनी नाम – तुच्छ कवि ‘भारत ‘
निवासी – ग्राम पो०-धौनी (शुम्भेश्वर नाथ) जिला दुमका(झारखंड)
कार्यक्षेत्र :- आई.एस.डी., सरैयाहाट में कार्यरत शिक्षक
योग्यता – बीकाॅम (प्रतिष्ठा) साथ ही डी.एल.एड.सम्पूर्ण होने वाला है।
काव्यक्षेत्र में तुच्छ प्रयास :- साहित्यपीडिया पर मेरी एक रचना माँ तू ममता की विशाल व्योम को स्थान मिल चुकी है काव्य प्रतियोगिता में।
नाम – भारत भूषण पाठक
लेखनी नाम – तुच्छ कवि ‘भारत ‘
निवासी – ग्राम पो०-धौनी (शुम्भेश्वर नाथ) जिला दुमका(झारखंड)
कार्यक्षेत्र :- आई.एस.डी., सरैयाहाट में कार्यरत शिक्षक
योग्यता – बीकाॅम (प्रतिष्ठा) साथ ही डी.एल.एड.सम्पूर्ण होने वाला है।
काव्यक्षेत्र में तुच्छ प्रयास :- साहित्यपीडिया पर मेरी एक रचना माँ तू ममता की विशाल व्योम को स्थान मिल चुकी है काव्य प्रतियोगिता में।
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