अरुण यह मधुमय देश हमारा था
अमिता मराठे
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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छंद मुक्त कविता
सृष्टि के दैवी आदिकाल में,
देवी-देवताओं का राज्य था।
सुख, शान्ति, समृध्दि विचरे,
धरातल स्वर्ग सा गौरवमय था।
अरुण यह मधुमय देश हमारा था।
यहां ऋषि मुनियों का बसेरा,
महान भूमि पर संतों का डेरा।
भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, तप, श्रध्दा,
त्याग, धैर्य, निष्काम, भावना।
अरुण ऐसा मधुमय देश हमारा।
उज्वल धरा पर उदित हुए,
जन नायक, जगतवंद महात्मा।
लोककल्याण के परम साधक,
सात्विक पावन जीवन प्यारा।
अरुण यह मधुमय देश हमारा।
एक जाति, एक धर्म, एक भाषा,
चहूं ओर पवित्रता का राज्य था।
विकार मुक्त, निर्विकारी दशा का,
सत्य, स्वतंत्र, स्वराज्य अधिकार था।
अरुण यह मधुमय देश हमारा था।
एकमत, एकरस, एकता का भाव,
व्यक्ति समाज पूर्णता में प्रसन्न था।
लोकोदय के ऊंच लक्ष्य से परस्पर,
भारत भू का जीवन मंगल प्रेरित था
अरुण यह म...

