सदाचार के पथ पर
प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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सदाचार के पथ पर चलना,
कभी न फिर तुम आँखें मलना।
जीवन में अच्छाई वरना,
हर दुर्गुण को नित ही हरना।।
कभी काम खोटा नहिं करना,
नेह-नीर होकर तुम झरना।
हरदम ही बनना उजियारा,
करना दूर सकल अँधियारा।।
नैतिकता के होकर रहना,
मानवता का पथ ही वरना।
सबकी सेवा में जुट जाना,
जीवन अपना धन्य बनाना।।
सच्चाई से जीवन बनता,
दुर्गुण तो खुशियों को हनता।
चाल-चलन मर्यादित रखना,
कभी नहीं कड़वे फल चखना।।
सदाचार से प्रभु खुश होते,
ऐसे जन बिलकुल नहिं रोते।
गिरे हुए तुम कर्म न करना,
बस अच्छाई को ही वरना।।
मन को शोधित करते रहना,
गंगाजल बनकर के बहना।।
पापों को बिलकुल तज देना,
सद्कर्मों को तुम गह लेना।।
नैतिकता से खुशहाली हो,
उपवन महकें,खुश माली हो।
सद्चरित्र से सद्गति होती,
मानवता किंचित नहिं रोती।।
नैतिकता से सं...

