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सावन का सुहावना झूला
कविता

सावन का सुहावना झूला

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** आता है सावन जब, मल्हार गीतों से गूंजती बहार सावन की हरी भरी हरियाली में, गूंजे गीतों की बहार ।।१।। सावन के सुरीले गीतों की मस्ती में, आंनद की बहार नवविवाहित सजती श्रावण में, करती सोलह श्रृंगार ।।२।। भगवान कृष्ण और राधा का सजता, सावन में दरबार श्रद्धालुओं की लंबी लंबी लग जाती, मंदिरों में कतार ।।३।। ब्रज में बुरा सेवन की परंपरा, दामाद आने की बहार सावन में ससुराल वाले, दामाद का करते इंतजार ।।४।। सावन में ठाकुरजी की आकर्षित लगती, सुंदर पोशाक दौड़े दौड़े आते भक्त, पहनाते बेबाकमनमोहक पोशाक।।५।। ब्रज रस में सावन का सुहावना, सुंदरता से सजा झूला कृष्ण राधा की युगल जोड़ी में, मधुरतम लगता झूला ।।६।। सावन में संस्कृतिसाहित्य की समृद्ध, नजर आती कला जिधर देखो सुनहरी छटा में सुंदर, ब्रज का सावन मेला ।।७।। चौरासीक...
भूल रहे घरेलू कला कौशलता
कविता

भूल रहे घरेलू कला कौशलता

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** न जाने क्यों किन कारण से दिन प्रतिदिन बदल गये अधुनिकता के रंग में ढल गए नए रंगरूप में उमंग-तरंग में चढ़ गए घरेलू कला कौशलता के नुस्खे भूल गए आधुनिकता में बेसुमार रम गए घर की रसोईघर में भोजन पकाने में मिट्टी के सुंदर टिकाऊ चूल्हे धुंए की लोहे की फुँकनी मिट्टी के बने मनमोहक घड़े तांबे पीतल के बने बर्तन मसाले कूटने के मामजस्ते काठ के बने चकले बेलन कांच के अचार रखने के व्याम अनेकों सामानों को अकारण उन्हें भूल गए पकाने की पद्धति में न जाने कितने पिछड़ गए पौष्टिक आहार बनाने में शिथिल पड़ गए भोजनालय की सारी पद्धति भूल गए घरेलू स्वादिष्ट भोजन छोड़ बाहर के स्वाद चखने में बेधड़क रम गए न जाने क्यों घरेलू कला कौशलता अधुनिकता के चक्कर में भूल रहे आधुनिकता के गहराइयों में बेहिसाब गहरे रम गए परिचय...
पतंगबाजी
कविता

पतंगबाजी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** हाथ में चरखी, चरखी में लिपटा धागा, चौकोर कागज की रंगीन पतंग हवा की मस्ती की लहरों में उड़ाता उड़ाने की ख़ुशी में सबसे हर्ष आनंद बढ़ाता सेहत बढ़ती, मिलती ताजी धूप प्रफ़ुल्लित मनमस्त हो चला जाता खुले वातावरण में चरखी औऱ डोर घुमाता कागज की सुंदर रंगीन पतंग आकाश में देख, ह्रदय खूब हर्षाता फेफड़ों में लाभकारी पतंग से खुशियाँ भारी पाता अच्छा ब्रीडिंग व्यायाम करता भारी ऑक्सीजन पर्याप्त मिलता ताकत भारी पतंगबाजी में करता प्रकृति से शरीर की प्रक्रिया नजरें प्रकृति से लड़ती लड़ता मन खुशियां मिलती न्यारी आसमान में उड़ाकर रंगीन पतंगों को रोगमुक्त का उपाय पतंग उड़ाकर मन को बढे चाव शरीर की पीड़ा जटिल रोग दूर होती पतंगबाजी से अनेक बीमारी एकाग्रता बनाए रख उड़ाए पतंग उड़ाए पतंग भगाओ परेशानी पतंग उड़ाने...
विश्वासघात का मकड़जाल
कविता

विश्वासघात का मकड़जाल

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सोचता हूँ विश्वास की लहरों में विश्वास के जोश में उड़ जांऊ विश्वास का लगा पंख पखेरू सोचता हूँ मिलेगी की लहरें विश्वास से ऊंचीउड़ान भर पाऊं।। विवेक से मै अलमस्त उड़ता जांऊ आंधी तूफान से भी लड़ता जांऊ मनमस्तिष्क में रख शीतल गहराई शीतलता की छाँव में ठाँव में पाँउ विश्वास से उड़ान मैं भर पाँउ।। निस्वार्थ से उड़ान जब भरूँ निस्वार्थ की मंजिल बस मैं पाँउ जख्म विश्वासघात का किसे बताऊँ विश्वास में विश्वासघात का निशाना विश्वासघात मैं अब पिसता पाँउ।।3 घातक तीर लगा कि पंख बचा न पाँउ विश्वास करुं जितना, घात उतना पाँउ विश्वास की उड़ान भरूँ विश्वासघात पाँउ भरता हूँ उड़ान, षड्यंत्र का तीर मैं पाँउ विश्वास की उड़ान भरने में समझ न पाँउ विश्वासघात के मकड़जाल में, उड़ न पाँउ।। परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रू...
रचे रचनात्मक जिंदगी
कविता

रचे रचनात्मक जिंदगी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सोचना समझना फिर करना जिंदगी का सबसे अहम काम, फुर्सत कभी मिलती ही नहीं, मिलता नहीं पलभर आराम ।। जिंदगी पहिये सी, घूम रही है शिकायत कभी करती ही नहीं, मौन भी रहती है हरदम जिंदगी सीख भी बेजोड़ देती जिंदगी ।। कहती है खुद पे खुद ये जिंदगी करो रोज, रचो रचनात्मक काम, समाज जाति देशहित के काम मौन क्यों, रचो रचनात्मक काम ।। प्रगतिशील गतिविधियों से लड़े जिंदगी प्रगति पथ पर खुद बढ़े मुसीबतो का जंजाल सताएगा सोचना समझना, काम आएगा ।। जिंदगी की है भारी भागदौड़ चुनो समाधान के नए नए मोड़ समाधान की तलाशते रहे धैर्य संयम रखो हरदम सांस मिलेंगे सरल स्रोत, मिलेगी राहें ।। परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्ष...
रामभक्ति में कंचन कुंवरी
कविता

रामभक्ति में कंचन कुंवरी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** अखिल भारतीय कविता लिखो प्रतियोगिता विषय :- "नारी और स्वतन्त्रता की उड़ान" उत्कृष्ट सृजन पुरस्कार प्राप्त रचना नारियों में नारी कंचन कुँवरी भक्तिमय जीवन में खूब तरी श्रद्धाभक्ति जगायी श्री राम की खुशियां भक्ति में पायी खरी।। श्रद्धा से श्रीराम को बसा ली बाल्यकाल से महिमा पा ली श्रीराम के चरण की भक्ति में रामभक्तिमय जीवन बना ली।। काव्यात्मक रस का प्रेमभाव रामभक्ति का रखा खूब चाव चित्तएकाग्र में पाया रामभाव सदैव बसाया रामभक्ति भाव।। भक्ति की तृष्णा बुझाती राम से गुनगुनाती गाती नितगीत राम के जीवनकर्म को अनन्य बनाया राम आराध्यदेव सुख सब पाया।। बेतवाँ की लहरों में नित बैठ रामभक्ति भाव पाती ठेठ महिमा राम की जान जीवन अर्पण समर्पण रामभक्ति में प्राण करती गई रामभक्ति सेवा सर्वस्व मान ली कंचन कुंवरी, राम...
होली के रंग
कविता

होली के रंग

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** अजूबे होते है ये होली के रंग लाल पीले नीले प्यारे-न्यारे, ये होते प्रेम बरसाने के सुनहरे रंग। रंग में होते अपने अपने मन पसंदीदा रंग नीले पीले गुलाबी मन को लुभाते रहते होली के सुनहरे प्यारे न्यारे रंग।। हरे-भरे उड़ाकर यत्र-तत्र रंग सुनहरे सजाते माहौल होली के रंग। मस्तमग्न सबको करते केशरिया, लाल, पीले, हरे, नीले रंग मौसमी गुलाबी बनकर होली के रंग।। रंग की बरसात की बौछार में प्यारे न्यारे दिखते ये रंग गुलाबी आसमान बादल में । सुनहरा सुहावना चढ़ाते मिश्रित होकर आनंदित करते ये होली के रंग ।। सुगंध में भरे होते होली के ये रंग सुनहरा रूपरंग में अलबेले बसन्त ऋतु पर खींचते ये रंग कवि के मन में शब्द के रंग राग भरते बेसुमार खुशियों में होली की मस्तीभरे ये रंग रंग में घुलने मिलने के फाल्गुन मौसम करते है जब ...
विद्या की देवी सरस्वती
स्तुति

विद्या की देवी सरस्वती

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** माघ मास में शुभ पंचमी का दिन यहहै,मंगल, पुण्य पावन पवित्र दिन श्री कृष्ण के कंठ से उत्पन्न देवी विद्या की, तू कहलाई सरस्वतीदेवी सरस्वती का आविर्भाव इस दिन कहलाता, बसंतीपंचमी का दिन ।।१।। अज्ञानता से ज्ञान का, दीपक जलाता कलम, कमल, पुस्तक,चरणों में चढाता ज्ञान, बल,बुद्धि की रखता भावना तनमनसे करता, सरस्वतीकी ध्यावना ज्ञानप्रकाश कीभरो रोशनी,यही भावना करता साधक, पूजन आराधना ।।२।। देवी सरस्वती का है तेज अत्यंत दिव्य ज्ञानमय अपरिमेय महिमा है अवर्णीय देवी सरस्वती की महिमा है अतुलनीय वाग्देवी, शारदा, बागेश्वरी, बाग्गदेवता सरस्वतीदेवी के है प्रचलितविशेष नाम देवी सरस्वतीका है सब करते गुणगान।।३।। श्रेष्ठता, दक्षता, असामान्य उपलब्धियां परिपूर्ण करो मां सरस्वती, ये विनती शारीरिक मानसिक आत्मिक शक्ति मेधावी विद्व...
आजादी की एकता
कविता

आजादी की एकता

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** विविधता में एकता का एक ऐसा आंदोलन चलाया विश्वभर में आश्चर्यजनक एक शोध बनकर दिखाया हिंसात्मक पथ पर कभी भी कोई आगे नहीं आया देश की मिट्टी से किया देशप्रेम स्नेह प्यार निभाया देश की मिट्टी में मर मिटने देशप्रेमी कसम खाया चढ़कर फांसी का फंदा हंसता हंसता प्राण गंवाया अविराम मरतामिटता देशप्रेमी लहूलुहान नजर आया देश की खातिर देशप्रेमी बेहिचक एक आवाज उठाया जुबान की वही आवाज का देशप्रेमियों पर था साया जाति धर्म भाषा त्यागकर एकता स्वयं दिखलाया विविधता में एकता की मजबूतगांठ देशप्रेमी बनाया कूदकर देशप्रेम में देशप्रेमी देश को सुरक्षित कराया यही है हिंदुस्तान, देशप्रेम के पथ का पाठ था सिखाया परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणि...
नशे से नाश
कविता

नशे से नाश

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** नशे से नाश विनाश, नशे से सर्वनाश मत करो नशा, मत रहो नशे के पास।।१।। पूछो उनसे, जो करते नशे, नशे में कूदे खोए धन समृद्धि सम्पत्ति, नशे से डूबे।।२।। जो रहे नशे में चूर, पड़ता असर है सुदूर बुरी आदतें नशे की, नशे में होते चूर चूर।।३।। नशे से हानियाँ, पारिवारिक परेशानियां नशे के प्रचलनों की बढ़ रही कहानियां।।४।। नशे को रोकने में बढ़े विचार, रुके नशा अविलंब करें प्रयास, रुके समाज मे नशा।।५।। नशे के लत में पड़े वे लोग, दुःख रहे भोग अशान्ति में घिरकर लगाए लूटने के रोग।। ६।। समाज में कोई भी करे नशा, मत करो गुस्सा समझाओ सिखाओ, दिखाओ बनाओ अच्छा।।७।। नशे से घटती स्थिरता आत्मविश्वास साहसिकता घुटुनभरी जिंदगी में नशेड़ियों बनकर जीवन जीता।।८।। नशे के कारण अक्सर बढ़ते है, जगह जगह अपराध नशेड़ियों को...
लहरा गए तिरंगा
कविता

लहरा गए तिरंगा

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** वो थे वीर साहसी निडर देश के असंख्य पुरुष महिला अनगिनत देश के नौजवान।। मर मिटे गए वो खुद हुए थे लहूलुहान बढ़ाते ही गए शक्ति समन्वय बढाये अपने देश का सन्मान।। बिछाया था जाल देश की खातिर मरने मिटने का देश की मिट्टी में झलकाये थे वे कमाल।। गुलामी की जंजीरें तोड़करलहरा गए वो भारत का प्यारा तिरंगा।। विश्वभर में भारत की गुलामी से मुक्त कर बचा गए वो मचा गए वो दिखा गए वो साहस और शक्तिवे थे भारत के वीर शान।। वे बजा गए खुशियों का मधुरिम डंका वे थे देश की रक्षार्थ सच्चे नोजवान।। परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
आओ मिलजर मनाएं मकर सक्रांति
कविता

आओ मिलजर मनाएं मकर सक्रांति

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** पौष जाए माघ आए शीत की छटा बह आये मकर सक्रांति पर खुशियाँ घर घर आये।। घरपरिवार में तिल गुड़ चिड़वा मुड़ी लाये मकरसक्रांति पर्व की खुशियाँ तनमनमे छाए।। मकर सक्रांति पर्व है ऐसा दान धर्म स्नान भाये वस्त्र अन्न बर्तन कम्बल का दानपुण्य बढ़ जाए।। तीर्थों में आनाजाना, मकर सक्रंति पर्व बताये भारतवर्ष के हर कोने में, मकरसक्रांति मनाए।। नदियां कुंड तालाब पोखरे में ठंडे जल से नहाए मकर सक्रांति पर्व की परंपरा की रीत निभाए।। दही चिड़वा घेवर खानपान में आनंद खूब लाये एक संग में शीत की लहर में अलाव को जलाए।। आसमान की रौनक चारो तरफ यह पर्व महकाये रंग बिरंगी लाखों पतंगों को उड़ाने की मस्ती लाये।। मकर सक्रांति माघ महीने का है दान धर्म का पर्व परंपरा को परम्परागत निभाये, सन्देश सब फैलाये।। आओ हम सभी प्...
रिश्ते में है अनमोल खुशी
कविता

रिश्ते में है अनमोल खुशी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** रिश्ते में है रहता अटूट स्नेहप्रेम प्यार रिश्ते में विद्यमान चैन सांस, रिश्ते में सकुशलता, जीने की सफलता रिश्ते में बहती प्रेम बंधन की सरिता।। रिश्ते में खून का नहीं देखते रिश्ता, रिश्ते में अपनेपन अहसास का जुड़ा होता रिश्ता रिश्ते बिना समूचा जग सुना सुना। रिश्ते से बढ़ता एक सशक्त अपना परिवार।। रिश्ते में रहती खुशियां और चाहत बहार रिश्ते में धन दौलत का नहीं रहता मोल रिश्ते में दिलों के रिश्ते होते अनमोल देते मन को तौल रिश्ते में न रहे दरार, बढ़े हरदम प्यार।। रिश्ते में सदैव बसा रहे करुणा, प्रेम प्यार रिश्ते में रोज रहे आपसी आना जाना रिश्ते में दुःख सुख में संगी हो नहीं बनाए बहाना रिश्ते की दीवार में भेदभाव हरदम घटाना।। रिश्ते में रखना सीखो रखो एक थाली रिश्ते में एक संग खाने की लाएं हरियाली रिश्ते में ...
अटल जी अद्भुत सरलता
कविता

अटल जी अद्भुत सरलता

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सरलता से जीना थाजीवन का सपना नितनियमधर्म का संयम पालन रखना अनुशासन सकुशलता से कार्य करना कड़वा विचार त्याग, मुस्कुराते रहना ।१। अनर्गल शब्द वाणी को विराम देते बोलने में गहरे, शब्दों में तोल देते फिजूल विषयों के उलझनों से बचते कर्मठता रखे, जंजाल में नहीं फंसते ।२। विचारों और भावनाओ को ह्रदय से खुलकर अपनी मधुरवाणी में कहते बात वही रखते जिनका मूल्यांकन सम्बोधन की भाषा में, गहरे रचते ।३। कविता की पंक्तियों को रुक रुक कर मीठे मीठे रसीले मधुरवाणी में कहते अंतहीन गहराई की कविताओं में अटल जी ह्रदय से बखूबी सटीक रचते ।४। उच्चतम विचारों में जीने की इछाओ में सीखे जीवन में उच्च कर्म करना बढ़ना अहंकार की भाषाओं में बातें न करना सदा सरलता में सीधे विचारों को रखना ।५। राजनीति जीवन में उतार चढ़ाव के मोड़ वे तनिक ...
भक्तों के घर आती नवदुर्गा
कविता

भक्तों के घर आती नवदुर्गा

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सिंह पर सवार होकर, नवदुर्गा, शरदकाल के नवरात्रि में जब आती, भक्तों के हर घर, हर आंगन में, ज्योत भक्ति भाव की, नियमित जलाती, देवी की पूजा पद्धति विधिवत करने की चौकी, माता की, भक्तों के घर सज जाती, अन्तर्मन में जगाकर प्रेम भक्ति का भाव विधिवत पूजा अर्चना का भरते भाव, श्रद्धालुओं में उमड़ता, मंत्रो का चाव समझते माता दुर्गा की शक्ति भक्ति भाव, कलश, दीप धूप रख करते भक्ति भाव विनती कर मैया से, जगाओ भक्ति भाव शारदीय दुर्गोत्सव की शुभ पावन बेला सुहावना, होता, भक्तिमय पल अलबेला आनंदित अंतरिम सुखमय मधुरिम भक्तिमय बन जाता, नवरात्रि का मेला मङ्गलमयदायक, प्रेरणादायक दुर्गा मेला विदाई में नम आंखे, खेलते सिंदूर खेला भक्ति गीत संगीत की तान ह्रदय में बजाती भावभक्ति से जगराते की रात जगाती मातारानी के नवरात्रि में शक्...
पितरों का श्राद्ध
कविता

पितरों का श्राद्ध

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** आश्विन का मास पूर्वजों को करते तनमन से याद, करते श्रद्धा से पितरों का तर्पण करते उनका श्राद्ध, पूर्वजो के प्रति परिवारजन में जगाते श्रद्धा पितृपक्ष पर रहता मन मे श्राद्ध करने का विचार, पूर्वजो की श्रद्धा में श्रद्धापूर्वक करते पितृपक्ष की सेवा में श्रद्धा से श्राद्ध, भोजन से पूर्व तनमन से तर्पण गौओ, कोए को करते पहले अर्पण देते पहले ग्रास, पितृपक्ष पूर्वजो का एक सुंदर पर्व पूर्वजो की याद में पन्द्रह दिन तक परिवारजन निभाते अनुभव में करते गर्व, पूर्वजो के बिना अधूरा है जीवन पहचान है पूर्वज उनकी ही देन है उनके ही वंशज यही है अपना जीवन, पूर्वजो के प्रति करते है श्राद्ध समझते रहे है कर्तव्य प्रतिवर्ष करे श्रद्धा से पितरों का श्राद्ध, पितरों को मुक्ति शांति मिले हम परिवारजनों ...
हिंदी की गूंज
कविता

हिंदी की गूंज

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** सितंबर का महीना जब आता हिंदी की उन्नति व प्रगति का हिंदी दिवस और पखवाड़े का मनाने की बेसुमार खुशी लाता हिंदी प्रचारक दीप जलाता अन्तर्मन से हिंदी का नारा तनमन से हो आता प्यारा प्रफुल्लित सबजन लगाता हिंदी की प्रबलता नई गति दिशाहीन हिंदी को दिशा ताकतवर ज्वार खूब लाता जमावडा सबका हो जाता जमकर हिंदी दिवस का डंका बजाया जाता हिंदी के प्रचारप्रसार का मनुहार जोरो से हो जाता खोजते है तमाम उपाय हिंदी फलतीफूलती जाय जोरों पर हिंदी पखवाडा प्रतियोगिता तेज. बढ़ाता विकसित करने को हिंदी नारा जोरशोर से लगवाता कामयाब करने को पखवाडा लगता जाता इसमें तमाम झाड़ा दिवस हिंदी का पखवाड़ा हिंदी का कार्यशाला हिंदी की प्रतियोगिता हिंदी की रचनाएँ हिंदी की जागरूकता हिंदी की सितंबर महीना आता हिंदी को मान्यता दिलाने की गूंज हरको...
पक्षियों का सुखी संसार
कविता

पक्षियों का सुखी संसार

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** ये पक्षियों का अपना जीवन जीने की अपनी इनकी शैली कितनी सूंदर कितनी होती अलबेली निर्भरता बिन खुद खुशियों में बीतती पशु पक्षियों की कार्यशैली करते काम वही जिनमें लगता आराम घोंसला स्वयं बनाते एक एक पत्तियों तिनखे चुगने को निकल जाते भोर में शाम तक ये प्यारे न्यारे पक्षी अपना काम जिमेवारी से स्वयं निभाते किसी को किसी से नहीं होता भरोसा खुद घरौंदा बनाने निकल जाते बच्चो को पहले खिलाते जुगाड़ में दूर दूर तक जाकर उदरपूर्ति के जुगाड़ में उड़ जाते पक्षियों की अलबेली दुनिया शांति सुख से जीवन बिताते पेड़ पर रहने का बसेरे एक एक तिनका चुगकर मुहं में लपेट लपेटकर अपना आवास बेरोकटोक बनाते किसी पर निर्भरता नहीं ये पक्षियों का संसार हंसते हंसते जिंदगी जीना हमको सिखलाते हरे भरे घने जंगलों पेड़ो पौधे में चिंतामुक्त ये...
मिटे बालश्रम
कविता

मिटे बालश्रम

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** बचपन बका जीवन पढ़ने खेलने कुदने खानेपीने मौजमस्त हंसी खुशी का जीवन बाॅंध पीठ पर पोथी विद्यालय का सुनहरा पढ़ने का प्यारा दिन शिक्षा अर्जित के दिन मजबूरी में बच्चों का बीत रहा सुहावना दिन वंचित विद्या से मासूम मेहनत में जुटा बचपन अथकपरिश्रम में बचपन शिक्षा के बिन उदासीन मेहनत में इन बच्चों का बीत रहा सुनहरा बचपन बालश्रम है देखो नबचपन क्यों है जबकि आंखे बंद श्राप गरीबी का ऐसा लगा बाल मजदूरी बढ़ता बचपन चूल्हा जलाने, रोटी कमाने भूख पेट की सबकी मिटाने सर्दी गर्मी आंधी तूफानों में कमाता बोझ उठाता बचपन परिवार की दीन दशा पर सुधार का सपना है बनता शिक्षादीक्षा करता है दफ़न पढ़ाईलिखाई बिन बीतता मासूम बच्चों का बचपन बेबस भी और लाचार भी जाने कितने मासूम बचपन जन-जन जागरूकता लाये बचपनसे शिक्षित हो जीवन मिटाओ बच...
पिता का प्यार
कविता

पिता का प्यार

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** जिंदगी का तजुर्बा एक पिता समझते बेटे उनके हम पिता कहते हाथ पकड़कर स्कूल ले जाते घर आते वो साथ ले आते भटक न जाय बचपन अनुशासन की डोर बांधकर बचपन में नियंत्रण पिता रखते गोद में बैठे हम हंसते या रोते पिता अपने प्यार में सन्तान को हँसते हंसते दुःख भरी जिंदगी बिल्कुल नहीं कहते धैर्य संयम की डोर बांधकर सशक्त करते पिता हंसते हंसते मस्त रहने के तजुर्बे में पिरोते पिता सुनाते खट्टे मीठे अनुभव हम दुबले या मोटे उपदेश पिता के नही लगते खोटे एक पिता ही है दुखी रहकर चाहत पूरी करते हम उन्हें पिता कहते परिचय :- ललित शर्मा निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है। ...
आठ से साठ
कविता

आठ से साठ

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** वक्त कब कैसे बीतता जीवनभर मन सोचता आठ वर्ष का बचपना खेलकूद से जी भरता कब जगते, खाते, सोते घरेलू नुस्खे उपजते खेलते कूदते बचपना बाल्यकाल में झगड़ते कब आया यौवनावस्था नही पता कैसे मस्त रहते बड़े बुजुर्ग गलतियों पर अक्सर वे कान पकड़ते आंख के इशारे से डरते चुप्प रहते मगर हंसते छोटीबड़ी बातें सुनते हंसते मुस्कुराते रहते कुर्सी में आगे बैठते बड़े पीछे कर देते पहले बुजुर्गवर्ग बैठते बचपना नही समझते हम अलमस्त हंसते युवावस्था, इन्हें समझते दिनप्रतिदिन यूं ही बीतते यौवनास्था से प्रौढ़ावस्था जिम्मेवारी में रहते रहते दुःखसुख स्वतः सुलझते सवारी थे ध्यान नही देते जन्मदिन आते बुलाते जाते तालियां बजाते हरदम अपने जीवन के खुशियों के दिन भूलते बस जीवन के दिन कटे जो हमे छोटे बच्चे कहते उम्र समय कैसे बीते ...
समझो क्या होती है मां
कविता

समझो क्या होती है मां

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** मां सुबह से शाम, बिन आराम बच्चों का हरदम रखती है ध्यान खुद भूखी रहकर बच्चो को पहले कराती है जलपान मां पहले बेटे को खिलाकर भोजन लेती चैन करती आराम हिम्मत इतनी देती थकने का नहीं लेती नाम खुद आग के धुएं में रोटी पकाकर हाथों से सेंककर बच्चो को खिलाती बच्चों की दुःख विपदाओं में मां पहले आगे आती मां आंखों में आंसू नहीं कभी झलकाती मां होती है कितनी भोली दुःख दर्द पीड़ा बच्चो की सबसे पहले समझ जाती बच्चों के जीवन की खुशियां मां अन्तर्मन से खुशियां लाती बच्चों के कष्टों के बादलों को मां पल भर में चतुराई से खुद कष्ट झेलकर हटाती जीवन के सच्चे पाठ सिखलाती जीवन की नैया पार लगाती जीवन का जंजाल मां स्वयं गले लगाती बच्चो की खुशियां खातिर सारी मोहमाया हटाती बच्चों की खातिर मां सुबह से शाम तक बरामदे में बैठी...
चुनाव का महापर्व
कविता

चुनाव का महापर्व

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** चुनाव का महापर्व चुनाव है लोकतंत्र को मजबूत करने का महापर्व मतदान का महायज्ञ खुद का अधिकार खुद को होता है गर्व किसी से न होता डर आता है जब चुनाव नेता को चयनित का बटन दबाकर करते गर्व मतदान की कतार में मतदान का दिखता महापर्व मतदान केंद्र में मतदाता भारी उत्सकुता से आता मतदाता कतार लगाता मतदान से निर्णय दे जाता चुनाव अधिकारी मतदाता का हिसाब चुनाव में रखता जाता चुनाव परिणाम में मतदाता का मतदान मुख्य भाग्य विधाता कहलाता चुनाव का अधिकार मतदाता को लोकतंत्र मजबूत की परिभाषा बताता मतदान केंद्र में एक एक मत का कितना है दम समझो कि है देश के मतदाता एक एक मत से लोकतंत्र मजबूत बनाते हम मतदान केंद्र में जाने का सबको समझाओ अर्थ अपने अधिकार का चुनाव दिखलाता अर्थ यही है चुनाव यही मतदान का महापर्व परिच...
होली का चटकीला रंग
कविता

होली का चटकीला रंग

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** महीना फाल्गुन मस्ती का आया, कि रंगों की खुशियां खूब है लाया सारा जहांन रंगों से खूब महकाया सुहावना खुशबूदार मौसम बनाया रंगों की कालीन यह पर्व बिछाया प्रेम प्यार का माहौल खूब बनाया घर आंगन में रंगों की ऋतु लाया पिचकारी रंग की सबपर बहाया प्यारी न्यारी मनभावन फुहार लाया फाल्गुन की रंग बिरंगी बहार लाया मस्ती भरी धुनों की तान में नचाया महफ़िल हंसी ठहाके की सजाया। सबको हंसा हंसाकर हंसी में डुबाया बिरंगीरँगीन कालीन बिछाते आया फाल्गुन फिर मधुर मुस्कान लाया हंसी मुस्कान से रौनक चेहरे में लाया। निमंत्रण फागुन का महीना भिजवाया सबको करीब यह महीना बुलाया जमकर रंग की पावन होली खिलाया मस्ती का माहौल होली पर्व बनाया खूब चटकीला रंग चेहरे पर लगवाया महकता मुस्कुराता रंग खूब उड़ाया चारोदिशाओ को सुहावना बनाया रंगो...
जिंदगी
कविता

जिंदगी

ललित शर्मा खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम) ******************** जिंदगी तो जिंदगी व्यस्त है जिंदगी समय बेकार व्यर्थ फिजूलखर्च में बीत रई है जिंदगी जिंदगी की कहानी जिंदगी की जुबानी जिंदगी ही समझाती जिंदगीभर सिखलाती जिंदगीभर सताती जिंदगी कहर बरपाती जिंदगी सुखदुख में जिंदगी बीत जाती जिंदगी कभी आसान जिंदगी कभी परेशान जिंदगीभर झनझनाहट जिंदगीभर आहट जिंदगी का अहसास जिंदगीभर करवाती जिंदगी समझ नहीं पाती जिंदगी कभी रुलाती जिंदगी कभी हंसाती जिंदगी का वक्त अच्छा जिंदगी का वक्त बुरा जिंदगी में हंसकर जिंदगी में रो रो कर जिंदगी सांसे लेती जिंदगी सांसो में जीते जिंदगी सांसो के भरोसे जिंदगी समेटे रखती जिंदगीभर बेफजूल जिंदगी लगती धूल जिंदगीभर की जिद्द जिंदगीभर होती न सिद्ध जिंदगी में नफरत जिंदगीभर करते कसरत जिंदगी की यही झंझट जिंदगी यहीं लेती करवट जिंद...