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अटल जी अद्भुत सरलता

ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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सरलता से जीना थाजीवन का सपना
नितनियमधर्म का संयम पालन रखना
अनुशासन सकुशलता से कार्य करना
कड़वा विचार त्याग, मुस्कुराते रहना ।१।

अनर्गल शब्द वाणी को विराम देते
बोलने में गहरे, शब्दों में तोल देते
फिजूल विषयों के उलझनों से बचते
कर्मठता रखे, जंजाल में नहीं फंसते ।२।

विचारों और भावनाओ को ह्रदय से
खुलकर अपनी मधुरवाणी में कहते
बात वही रखते जिनका मूल्यांकन
सम्बोधन की भाषा में, गहरे रचते ।३।

कविता की पंक्तियों को रुक रुक कर
मीठे मीठे रसीले मधुरवाणी में कहते
अंतहीन गहराई की कविताओं में
अटल जी ह्रदय से बखूबी सटीक रचते ।४।

उच्चतम विचारों में जीने की इछाओ में
सीखे जीवन में उच्च कर्म करना बढ़ना
अहंकार की भाषाओं में बातें न करना
सदा सरलता में सीधे विचारों को रखना ।५।

राजनीति जीवन में उतार चढ़ाव के मोड़
वे तनिक नहीं घबराए संकल्प रखे जोड़
अपनी कथनी करनी में रहे हमेशा अटल
टल गई विपदाएं उनके व्यक्तित्व के बल ।६।

देश के प्रधानमंत्री के पद पर हो आसीन
देश को ऊर्जावान बनाये रखे रात दिन
विकसित करने की योजनाओं को नित
फलीभूत साकार में अटलजी रखे प्रीत ।७।

गांवगांव, शहर शहर तक खूब किये मेहनत
राग खूब आलाप किये जिसमें बने प्रशंसक
प्रखर कवि, दिग्गज राजनेता की माने बात
ऐसे चमके अटलजी टलती नहीं कोई बात। ।८।

परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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