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अद्भुत अनुभूति

माधवी तारे
लंदन
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लंदन का बादलों से भरा कम या ज्यादा ग्रे रंग और उसमें उठ कर दिखने वाला गेरु और पीले रंग में मुस्कुराता हुआ लंदन का रॉयल अलबर्ट हॉल न केवल आर्किटेक्चर के तौर पर सर्वश्रेष्ठ कंसर्ट हॉल है बल्कि संगीत सुनने के लिये भी बेहतरीन जगह है। करीब १५० साल पुराने इस हॉल में जाने का सौभाग्य मुझे २०२५ के नवंबर में मिला। बाहर से यह पांच मंजिला सभागृह जितना भव्य दिव्य दिख रहा था, अंदर उस भव्यता में और चार चांद लग रहे थे। ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था, लोगों की अनुशासनबद्धता और पूरा माहौल अद्भुत ही था। पांच हजार से ज्यादा लोगों के बैठने की व्यवस्था यहां है और अधिकतर यहां भारतीय महिलासंगीतकारों और गायकों के कार्यक्रम होते हैं। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और रफी साहब, स्व, मुकेश आदि के यहां अनेक कार्यक्रम हुए हैं। और मुझे यहां शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के पहले हिस्से में गायत्री और रंजनी ने कर्नाटक पद्धति और फिर कौशिकी चक्रवर्ती ने उत्तर भारतीय पद्धति का गायन पांच भाषाओं में प्रस्तुत किया। संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड और मराठी भाषाओं में उन्होंने भजन और अभंग प्रस्तुत किये। घटम्, ढोलक और अन्य वाद्यों की साथ में जब तुकाराम के मराठी अभंग से अपने गायन का समापन किया तो श्रोतागण एक अलग ही आध्यात्मिक और सांगीतिक अनुभूति में डूबे हुए थे जिसकी बानगी श्रोताओं की अनवरत बज रही तालियों में देखने को मिली। गायन को विराम मिलते ही तालियों की ध्वनि हॉल में गूंज रही थी।
ऐसा महसूस हो रहा था कि तालियों की ये स्वरलहरियां लंदन के हॉल से होती हुई देहू (संत तुकाराम के समाधि स्थल) तक पहुंच अरब सागर में विलीन हो रही हैं। जिस ब्रिटेनी राज ने भारत को अनेक साल गुलाम बनाए रखा और जिस लॉर्ड मेकॉले ने भारत की संस्कृति और भाषा को दबाने की कोशिश में कोई कसर नहीं छोड़ी थी उसी देश में भारतीय संस्कृति, भाषा और लोगों को दबदबे को महसूस कर दिल को ठंडक महसूस हुई और लगा कि भारतीय संस्कृति और को अब कोई मैकॉले नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

परिचय :-  माधवी तारे
वर्तमान निवास : लंदन
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
अध्यक्ष : अंतर्राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच (लन्दन शाखा)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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