विकल्प
श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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समय कभी तय नहीं होता
होता भी तो मेरे हाथ मे नही है
किन्तु विकल्प क्या है!
चाँद और सूरज ने अकेले ही
मजबूत बनने के बहाने दे दिए
बारिश की बूँदों ने
हथेलियों पर
कुछ ख्वाहिशे रख दी
जिनसे हथेलियाँ तो भीगी
किन्तु रेखाएं भरी नहीं,
ऊँचाई ने चलते चलते
पर्वत के शिखर पर पहुचा दिया
आनंदित हूँ क्युकी विदा का
पल निकट आता जा रहा है
उस हवा की तरह जाना चाहती हूँ
कि गुजरूं करीब से तो
सरसराहट की भनक भी ना हो,
शिकन नहीं मुस्कराहट
छोड़ जाना चाहती हूँ
जीवन पर्यंत प्रयासशील रही
सबकी झोली खुशियों
से भरना चाहती थी
जीना कोई मजबूरी नहीं, बस
शिवमय होना चाहती हूँ!!
परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी...


