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Tag: किरण विजय पोरवाल

मेरी मांँ
कविता

मेरी मांँ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मन की बातें किसे बताए कौन है जो गले लगाये, समझे जो कोई मेरी बातें, वह तो मेरी माँ ही जाने। दुख-दर्द, दुख-सुख को जो जाने, मन के भाव को जो पहचाने, प्यार और दुलार की जो है जननी। संबंधो की जो है टहनी, उज्जवल भविष्य की कामना जो करती, निर्मल मन निर्मल है विचार, संस्कार और संस्कृति का रखे जो ख्याल, मान मर्यादा का जो पाठ पढाती, बच्चों का रखती जो खयाल, माँ तो माँ बस माँ होती है चन्दा सी शीतल है मां ,सुरज सा प्रकाश हे माँ माँ तो बस माँ ही होती है। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्ज...
प्यारी माँ
कविता

प्यारी माँ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** माँ मेरी ममता की मूरत, मिले हमेशा तेरी गोद। शान्ति शकुन है तेरी गोद मै, प्यार ममता की छाँव भी। सुख चैन आँचल मै तेरे, मीठी लोरी भाव है। हर जनम तेरी गोद मिले माँ, प्रेम स्नेह अपार है। मधुर बोल शांति स्वरूप माँ, सुख दुख सहती अपार है। माँ का आँचल इतना विशाल, समा जाये सब घर संसार। निर्मल मन निर्मल विचार, देती माँ तू शुभ आशिर्वाद। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" से सम...
माँ … ज्ञान का सागर
कविता

माँ … ज्ञान का सागर

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** ज्ञान का सागर है माँ, तू भक्ति की आराधना, सरस्वती सा विवेक तुझमे, तप-बल की तू शक्ति माँ। इस सागर मै नहार कर के माँ ज्ञान की ज्योति तुम्ह से पाई। भक्ति मै सरोबार होकर माँ प्रेम की रित तुझसे पाई। तेरी गोदी पाकर के माँ काव्य गीत मैने गाया, शक्ति बल पाकर के तुझसे यह कलम दवाद चलाई माँ। शान्त चित्त बुद्धि पाकर के यश तेरा फैलाया माँ, कठिन घड़ी और कठिन परीक्षा बस तेरा आशीर्वाद है माँ, प्रेम की धारा माँ है मेरी पिता किनारा नदियो का, कैसे हम बहकर के जाये, जो हाथ हे थामा गुरूवार का। अहंकार मान ना आये गुरूवार, हाथ झडी़ थामै रखना, प्रेम बोल से फटकार तुम गुरुवार। मुझ दिनन पर मडँते रहना परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर...
इंतजार
कविता

इंतजार

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कोयल को इंतजार है सावन की हो फुहार, प्रेमी को इंतजार है प्रियतमा की चाह, एक भक्त को इंतजार है ईश्वर का सानिध्य, शिष्य को इंतजार है गुरु का मिले आशीष, धरती को इंतजार है कब बरसेंगे मेघ, सागर को इंतजार है नदियों का समावेश, एक मोरनी को इंतजार है स्वाति नक्षत्र की एक बूँद। निषाद को इंतजार है श्री राम सा मित्र, शबरी को इंतजार है गुरू का है उपदेश बैर खाये श्री राम प्रभु कई जन्मो का मेल। अहिल्या बैचैन है पाषाण का मिला अभिश्राप प्रभु राम की रज मिले होवे आज उद्वार। केवट को इंतजार है कब नाव चढ़े श्री राम, रावण को इंतजार है योद्धा कौशल राम। जटायू के पर कटे इंतजार हे राम बेटे का सा प्रेम मिला उद्वारक श्री राम, कोसल्या को इंतजार है कब आयेगे मेरे राम। सूनी अयोध्या मै खुशियाँ फिर लौट आयेगी आ...
जय हिन्द जय भारत
कविता

जय हिन्द जय भारत

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** उमंग की बौछार हो, उत्साह की बयार हो, आनन्द की बरसात हो, और प्यार की बहार हो, जीवन अब खुशहाल हो, मन मे अनुराग हो, बस दिल मे एक भाव हो, स्वस्थता की बात हो, रोग मुक्त जहान हो, निर्मल आकाश हो, स्वस्थता का वास हो, प्रकृति मै बहार हो, विपदा सब दूर हो, जीवन मे रंग हो, मन मे उमंग हो, एकता का गान हो, देश भक्ति का भाव हो, प्रार्थना और वंदना हो, देश खुशहाल हो, सूर्य मे प्रकाश है, अन्धकार का नाश है, देश खुशहाल हो परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिं...
शौर्य यात्रा
कविता

शौर्य यात्रा

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** शोर्य वीरता स्वाभिमान है वीर पराक्रमी योद्धा यहां, चाहे रक्त बहा धर्मवीरों का पर धर्म सनातन अमर यहाँ, वार किया विध्वंस किया मूल नाश किया उन आतताईयो ने, मुगलों ने मंदिरो को तोड़े है पर "आस्था" तोड़ न सके मन का। मुगलों का आक्रमण झेला है, कितने मंदिरों को तोड़ा है, आखिर में हार गए पापी, पर धर्म को सनातनियों ने नहीं छोड़ा है। थे एकजुट हे एक लक्ष्य हे मानवता हे प्रेम यहां, हे वीर पराक्रमी योद्धा यहां, हे देशभक्त हे संत यहां, हे धर्म संस्कृति का पाठ यहां हे तप तपस्या का भाव यहां, हे ज्ञान का दीप, सहानुभूति यहां, हे भाईचारे जैसे संबंध यहां। चाहे साल शताब्दी संवत बीते, नहीं मिटा सके कोई धर्म यहां, रग रग कण-कण में व्याप्त यहां हे परमेश्वर का हे वास यहां। इसे मिटा नहीं सकता कोई मिट गए यहां मिटान...
अनमोल जीवन
कविता

अनमोल जीवन

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** यह जीवन बड़ा अनमोल है, पुण्य कर्मों का मेल है, जीने की यही तमन्ना है कुछ कर गुजरने की मंछा है। काम कुछ करना है नाम कुछ करना है, व्यर्थ ना चले जाए नहीं तो हाथ मिलना है, मैं कुछ ऐसा लिखूं जो इतिहास बन जाए, इतिहास के पन्नों पर नाम अमर हो जाये, मुझे तो जिंदा रहना है। शिक्षा गरीबी नारी पीड़ा समाज सुधार पर बात बने, मै नींव का पत्थर बन जाऊं, दबकर भी कुछ करना है, मुझे तो जिंदा रहना है। राजनीति नहीं मेली हो, भ्रष्टाचार का नाम ना हो, मेरी कलम भी तलवार बन जाये, कुछ करके मुझको जाना है, मुझे तो जिंदा रहना है। प्रभु सेवा यहाँ सब कुछ है, हर क्षण हर सांस में तेरा डेरा हो, आत्म कल्याण का मार्ग बने, ऐसा मन में बसेरा हो, मुझे तो जिंदा रहना है। नहीं देश-विदेश में जंग रहे, शांति का सदा उल्लास रहे, जीव...
अलविदा २०२५
कविता

अलविदा २०२५

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अलविदा कहे नफरत को, अलविदा कहे द्वेष को, अलविदा कहे आलस को, अलविदा कहे कटुता को, अलविदा कहे दुश्मनी को, अलविदा कहे राग को, अलविदा कहे कुविचारो को, अलविदा कहे मन के मेल को, अलविदा कहे अन्याय को, अलविदा कहे आतंक को, अलविदा कहे गरीबी को, अलविदा कहे विकारो को, अलविदा कहे दुष्टता को, अलविदा कहे अत्याचार को और अलविदा कहे 2025 को, अलविदा कहे शिकवा गिला को, सुबह उगते सुरज की किरणो के साथ नया सवेरा लायेगे 2026 की नयी कविता के साथ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मान...
अपनापन
कविता

अपनापन

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** ना दिल मै खुशी ना मन मै उमंग, अपनो का गम बस अपनो का गम, दिखावा बस दुनिया का, फोटो का और बस संकीर्ण विचारो का। परिवार एक दिखावा नही, दिल के एक तार का, हँसी के पात्र का नही, ससम्मान का। पात्र सोने चाँदी का बनो नही काँच के गिलास सा, कोई भी आये ठुकरा जाये धराशाही पल मे नाश सा। राज बनो ताज बनो, शान और अभिमान बनो, एकता की एक मिसाल बनो, कोई दुशमन घात ना डाले, ढाल बनो तलवार बनो, हर पग का तुम साथ बनो, प्यार करो सम्मान करो, और दिलो पर राज करो परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ...
मेरी माँ
कविता

मेरी माँ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** आशा और विश्वास की, गहराई और उडा़न की, सोच और विचार की, अच्छे और बुरे की एक शुभ चिंतक होती है माँ। खुशी और गम की, आव और भाव की, दर्शन और विज्ञान की एक कला होती है माँ। पथ और संचलन की, निर्जन मन मै ज्ञान की, अंधकार में प्रकाश की, भटके को राह की एक पथिक होती है माँ। डुबते को सहारे की, मेहनत और उत्साह की, खुशियो के खजाने की, आँसू को पी जाने की, जीवन मे एक तरंग सी, लहर होती है माँ, नीरस मै रस की, अमृत सा पान की, एकान्त मै ध्यान की, भक्ति और शक्ति की, संस्कार और संस्कृति की जननी होती है माँ। समय के ज्ञान की, साहस और विश्वास की, साथ और विकास की शक्ति होती है माँ । शान्ति और मंगल की, प्रेम के प्रसाद की, आनन्द और उमंग की दरिया होती है माँ। परिचय : किरण विजय पोरवाल पत...
कठिन डगर
कविता

कठिन डगर

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** जीवन की यह राह कठिन है, जीवन की यह डगर कठिन है, कितनी उलझन कितना भार कितनी चिंता कितना काम। हर उम्र के पड़ाव में बढ़ता जाता है यह भार, मानसिक शारीरिक व्यापारिक सांसारिक, उलझन में फसता जाता इंसान। चिंतन कम चिंता ज्यादा, भक्ति कम बदलाव ज्यादा, स्मरण कम उलझन ज्यादा, दर्शन कम प्रदर्शन ज्यादा। होड़ की इस दौड़ में घानी का सा बेल जुत गया प्यारा, जीवन के इस चक्र में घूमता-घूमता रह गया न्यारा, आओ इस उलझन को हम दूर करें। चिंतन और मनन से, पठन और पाठन से, ज्ञान ध्यान योग और विद्या से, संतो महंतों की वाणी से , दान और पुण्य से, तीर्थो में भ्रमण से, आदर और सत्कार से, सेवा और पूजा से, प्रेम और विश्वास से , इस काया को कंचन करें मेल और मिला से। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय प...
महाकाल की नगरी प्यारी
कविता

महाकाल की नगरी प्यारी

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** महाकाल की नगरी प्यारी, तीनों लोकों से है न्यारी। यहां बसते हे कालों के काल, वह तो है बस महाकाल। सप्तपुरी में उज्जैनी नगरी, शिप्रा निर्मल पावन बहती, पापो का करती नाश। यहाँ ज्योतिर्लिंग महाकाल। वह तो है कालों के काल, दुष्टो का करते नाश। यह नगरी विक्रमादित्य की नगरी, राजा महाराजा न्याय प्रिय की है यहां कृष्ण सुदामा पढ़ने आए, सखा प्रेम की देते मिसाल। साधु सन्यासी बसे ओघड़ी, भक्तों का लगे डेरा द्वार। १२ वर्ष में सिहस्थ है लगता, अमृत बरसे शिप्रा के घाट। तपोभूमि तांत्रिक की भूमि, त्यागी और योगी की भूमि, ओघडी़ और महंतों की भूमि,। कवियों और दार्शनिकों की भूमि, नवरत्नों की देखो खान, उज्जैन नगरी पावन धाम। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ...
सीख
कविता

सीख

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** फूलों से सीखा मैंने है महकना। पेड़ों से सीखा मैंने है झुकना। नदीयो से सीखा बढ़ते है रहना, धरती से सीखा धैर्य है रखना, आकाश से सीखा मौन है रहना, पशु पक्षी से सीखा नियम में चलना। संतो से सीखा संयम में रहना, गुरु से सीखा आत्मा में रमना, कांटों से सीखा सम्भल कर चलना। शत्रु से सीखा कूटनीति का ज्ञान, दोस्त से सीखा का स्नेह और प्यार, मां से सीखा संस्कारों का ज्ञान, पिता से सीखा दुनिया की पहचान। प्रकृति का कण-कण हमें दे रहा है सीख, गुढ़ रहस्य उसमें छुपा, ज्ञान ध्यान और योग। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्र...
लालच सिंहासन का
कविता

लालच सिंहासन का

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कहे द्रोपती ! दुर्योधन से- पतियों ने दावँ पर लगाया है, उनकी तो मति मारी है गई, तू क्यों दुष्टता लाया है। भाई भाई के बंटवारे में क्या दोष मेरा है, हे पांडव! क्यो? दुशासन के निर्लज हाथों मेरा क्यों चीर फडवाया है, अपमानित मुझे कराया है। क्यों आँख बचाते हो अर्जुन क्यों गांडीव गिर रहा हाथो से। क्यों भीम की गदा देखो छूट रही, युधिष्टिर ने मौन को साध लिया? हे गंगा पुत्र भीष्म पिता क्यों कर्मों का तुम नाश करो। दुशासन खींचो साड़ी को इसे नग्न बिठाओ जंगा पर, आज शर्त मेरी पूरी करना कोई बीच ना आए नर नारी। द्रोपती ने वस्त्र को पकड़ा है पांवो से दबा यू जकड़ा है, दोनों होंठ से दबा-दबा उस शर्म को दांतों से पकडा है, मन ही मन कान्हा को पुकारती है, तुम आ जाओ हे बनवार यदि लाज बहन की है प्यारी, तुम आ जाओ हे...
मांँ
कविता

मांँ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** मांँ एक दर्पण है, मां मन का भाव है, दिल की पहचान है, माँ निश्छल प्रेम है, मां समय का ज्ञान है, मां समझ है, माँ मेहनत है, मां विचार है मां मार्गदर्शक है। मां हिम्मत है मां साहस है, मां शक्ति है मां भक्ति है , मां वर्तमान भूत और भविष्य है, माँ कोमल है मांँ कठोर है, मांँ आनंद है माँ खुशी है, मांँ सोच है माँ विचार है, मांँ आंसू है माँ खुशी है। माँ घर की रौनक है मांँ बहार है। मां गरीबी पर अमीरी है, तो मांँ मान और सम्मान है परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३....
करवा चौथ
कविता

करवा चौथ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** सजकर सौलह श्रृंगार प्रियतम के नाम का, प्रीत की डोर सदा बँधी रहे तेरे मेरे प्यार की। प्रकृति सी हरियाली रहे मेरे घर अँगना, चंदा सा चादोल्यो रहे मेरे सिर पर धरा। लाल पीली चुदड़ मै बूटा लाल गुलाब, अमर चाँद का दीदार करू मै सौ-सौ बार, अमर रहे सुहाग मेरा चन्दा से प्यार का। सुन्दर रूप चन्दा मै देखु मै मेरे प्रीतम का, नजर ना लग जाये सुन्दर जोडी पे काला दाग है चन्दा में। सदा सुहाग का वर मांगू मै, अमर शिवत्व सी जोडी़ रहे, ये शिव बन जाये, मै गवरा बनी रहू चरणन मै। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्री...
दीप से दीप जलाऐ
कविता

दीप से दीप जलाऐ

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** दीप से दीप जलाऐ, मन से हर भेद मिटाएं। प्रेम के दीप हर मन में जलाकर, राग द्वेष का भेद मिटाएं। प्रेम का दीपक ज्ञान की बाती, हर मन मे यह भाव जगाऐ। मन कंचन सा दीप ह्रदय में, रजत सा उज्जवल प्रेम बढ़ाएं। एक दूसरे का मान रखे हम, जैसे दीप से दीप जलाएं। द्वेष का दीप ना जले इस मन में, हर मन में यह भाव जगाऐ। छोटा दीप उज्ज्वल है प्रकाश, जैसे सूर्य उदय अंधकार का नाश। तेज पुन्ज दीपक का प्रकाश, राग द्वेष का कर दे नाश। दीपों का यह उत्सव प्यारा, हर मन में आशा के भाव। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्र...
जीवन का सार
कविता

जीवन का सार

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** अपनी अंतर आत्मा से पूछो? "क्या खोया क्या पाया है" क्या जग से है लिया है हमने, क्या जग को लौट आया है। कितना प्रेम दिया है हमने, कितना प्यार लुटाया है, कितना दिन दुखीयो को हमने, अपने गले लगाया है। कितना दान दिया जीवन मै, कितना छिना दुनिया से, कितना राग द्वेष किया है, जग में जीने वालों से। भला किया या बुरा किया, हिसाब लगा लो आत्मा से, कितने दिलों को तोडा़ हमने, कितना सेतू जोड़ा है। "एक पल हम मर कर है देखे", कौन रोये कोन हंँसता है, कौन हमें अच्छा है कहता, कौन बुरा आज कहता है। यदि अश्रुधार भये जन जन की, तो जग मै नाम है कमाया है, पीछे से अपशब्द जो बोले, जीवन में नाम डुबाया है। यही आनंद दिवाली का जीवन, यही होली का रंग लगाया है, यही दशहरे की जीत है पाई, राखी का प्रेम कमाया है। जीवन का हिसाब...
अनमोल भाव
कविता

अनमोल भाव

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कवि की कविता को जाने, कवि की भावना पहचाने, चिन्तन की गहराई जाने, मनन की एक सोच पहचाने। आकाश सी ऊँचाई जाने, पंछी सी उडा़न है उसकी। एकाग्रता का ध्यान है उसमे, ज्ञान और विज्ञान है उसमें, धर्म और समाज का बोध है उसमे, ज्वालामुखी सा विस्फोट है उसमें। नदी सा बहाव है उसमें, चक्रव्यू सी रचना है उसमें। तोलमोल के तराजू मे तोल, आग मै तपकर सोना बनता अनमोल। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट...
चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश
स्तुति

चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चन्द्रमौलेश्वर मनमहेश, शिव ताडवं करते महेश। उमा महेश वन करते विहार, घटा टोप बादल अपार, सप्तधान शिव स्वरूप अनाज, सुन्दर मुख होल्कर महान, शेषनाग शिव मस्तक धारे, गले भुजगं अति शोभित साजे, महाकाल विकराल काल शिव, रजत पालकी बैठै मौलेश्वर, दर्शन कर भक्त हुये निहाल, जयकारा गूँजे महाकाल। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा "साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४" से सम्मानित ४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना रूचि : कविता...
प्रकृति
कविता

प्रकृति

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** बादलों से आलिंगन करते पर्वतों की श्रृंखला है अपार। ऊंचे ऊंचे पर्वतो के मध्य श्वेत झरनों की धार। ऊँचे पर्वतो से यात्रा करके मिलते हैं धरती से आज। हर पल मे बरसते देखो एक पल मै ओझल हो जाते, अपने आंचल में है समेटे बादलो का बिखर रहा है जाल। हरियाली अपने यौवन पर फल-फूल रहे हैं झाड़। कभी गरजते कभी बरसते कभी मौन हो जाते आप। देख नजारा प्रकृति का टकटकी लगाये अखियां आज। देखो दृश्य ओझल ना हो जाये स्वर्ग उतरा धरती पर आज। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन विशिष्ट उपलब्धियां : १. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित २. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित ३. राष्...
चलते रहना ही जीवन है
कविता

चलते रहना ही जीवन है

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** चलते रहना ही जीवन है, चाहे सुख आए या दुख आए, चाहे काँटे भाटे रोडे आए, इन सबको पार करते चलना, चलते रहना ही जीवन है। चाहे ओलावृष्टि आती हो, चाहे गर्मी कितनी सताती हो, जीवन में लक्ष्य लेकर चलना, चलते रहना ही जीवन है। मंजिल की आस रहे दिल में, चाहे कितनी कठिनाई सामने हो, हो चट्टान का सामना भी, चलते रहना ही जीवन है। कुछ पाना है तो चलते रहना, बढ़ते रहना हो लक्ष्य सदा, ना हार कभी मन में लाना, ना नर्वस होकर तुम रहना। उठो चलो ! चलते रहना चलते रहना ही जीवन है। कभी नही उदास हो जीवन मै, नहीं कभी हतोत्साहित हो जीवन मै, खुश होकर चलते ही रहना, चलते रहना ही जीवन है। नदियों की तरह बढ़ते रहना, नाचते गाते उत्साह भरे, मंजिल तो एक दिन पाना है, चलते रहना ही जीवन है। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : वि...
एक औरत
कविता

एक औरत

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** कितना गम दबाती मन मै, कितना गम वह पी जाती, ओरौ के खातिर जीती है वह, औरों के खातिर ही मर जाती? पल-पल जीती पल-पल मरती हर क्षण गिरकर फिर संभलती, अपने साहस अपने बल पर, गिरती पड़ती फिर उठती। मान, अपमान, नफरत,तिरस्कार, सब सहती जाती जीवन में। कभी सोचती कभी उलझन है, कभी उलझन को सुलझाती! कभी खुद उलझन में पढ़ जाती, हंस देती सब सह कर वह तो, नही खोलती मन का राज। हर नारी की गाथा है यह, हर नारी की परीक्षा है, चाहे रानी महारानी हो जग में, चाहे गरीब भीलनी वन की हो। चाहे सीता सतवंती नारी हो, चाहे प्यारी राधा रानी हो , चाहे सती सावित्री मीरा हो, अग्नि परिक्षा नारी की हो। "नारी की गाथा नारी की पहचान बखान कर रहा इतिहास है आज" परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (...
घूंघट
कविता

घूंघट

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** सिमट गया घूंघट देहली तक, सिमत गया घूंघट घर द्वार, सिमट गया घूंघट होठों पर, सिमट गया चित्रों में आज। घूंघट में अब लाज छुपी नहीं, घूंघट में अब शान छुपी नहीं, मान सम्मान की बात छुपी नहीं, घूंघट में अब शर्म छुपी नहीं। घूंघट में अरमान छुपे नहीं , घूंघट में कुछ बात छुपी नहीं, घूंघट में अब मान छुपा नहीं, घूंघट में कुछ राज छुपा नही। घूंघट में अब मान बिक रहा, घूंघट में सम्मान बिक रहा, घूंघट अब बाजार बन रहा, घूंघट अब व्यापार बन रहा। घूंघट कवियों की वाणी मै, घूंघट कविताओं की लेखनी मै, घूंघट बड़े बूढ़ों का मान, घूंघट राजपूतो की शान, मर्यादा और सम्मान का भाव। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूम...
फटा बनियान
कविता

फटा बनियान

किरण विजय पोरवाल सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) ******************** फटे बनियान का राज बहुत है, पिता के मन का भाव जुडा़ है, छुपा है उसमें कहीं है राज, देखो एक पिता का त्याग। जोड़-जोड़ कर आगे बढ़ता, कंजूसी उस पर है थोपता, छिन-छिन हो जाये जब तक ना आप। बच्चों की हर उमंग तार मै, डॉक्टर इंजीनियर का राज तार मै, परिवार का हर भार तार मै, कई भोझ का भार तार मै, नहीं खरीदता पहने रहता, कोई आए उसे ढक वह लेता, कई दिल के अरमान है तार। सूरज की तपन है सहता, लाज शर्म मेहनत है तार मै, अपनी धुन अपना एक भाव, आगे बढ़ना उसका काम। अपने मन पर कंट्रोल हर वक्त है, नहीं चलेगी किसकी बात, फटी बनियान का बड़ा है राज, फिर भी जीता यथार्थ में आज। परिचय : किरण विजय पोरवाल पति : विजय पोरवाल निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स व्यवसाय : बिजनेस वूमेन वि...