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Tag: देवेन्द्र देव “मिर्जापुरी”

यादों का घर
कहानी

यादों का घर

देवेन्द्र देव "मिर्जापुरी" बुलंदशहर (उ.प्र.) ******************** शाम ढल चुकी थी। आकाश में धूप का अंतिम रंग जैसे धीरे-धीरे सिमटकर अँधेरे में खो रहा था। घर के आँगन में खड़ा पुराना नीम का पेड़ अब भी वैसे ही खड़ा था, पर उसके नीचे बैठने वाला आज कोई नहीं था। अजय बरामदे में रखी उसी कुर्सी पर बैठा था, जहाँ कभी उसके पिता जी अख़बार पढ़ते हुए उसे जीवन की बहुत-सी छोटी-छोटी सीखें दिया करते थे। आज कुर्सी खाली थी, पर उस पर जैसे अब भी किसी के होने का अहसास बाकी था। हवा का एक झोंका आया और पास रखे अख़बार के पन्ने अपने आप फड़फड़ा उठे। अजय ने चौंककर देखा। “पिताजी…?” उसके होंठों से अनायास निकल पड़ा। कुछ क्षण के लिए उसे लगा जैसे वही परिचित आवाज सुनाई देगी- “अरे, ऐसे चौंकते क्यों हो? बैठो, कुछ बातें करते हैं…” पर वहाँ सिर्फ खामोशी थी। पिता जी को गए हुए कई महीने बीत चुके थे, लेकिन हर शाम...