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Tag: नील मणि

होमबाउंड – फिल्म समीक्षा
फिल्म

होमबाउंड – फिल्म समीक्षा

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** प्लेटफॉर्म पर परीक्षार्थियों की खचाखच भीड़ - रेलगाड़ी में चढ़ने के लिए मारामारी - परीक्षा केंद्र तक पहुंचना ही पहली लड़ाई है- परीक्षा हो भी जाए तो उसके बाद परिणाम के लिए सालों तक इंतजार करना- हुनर की कद्र नहीं है; जातीय भेदभाव हावी है। गफलत भरा बीतता समय बहुत सुंदरता से दिखाया है; परिणाम में भी जातिगत भेदभाव; तीर से चुभने वाले डायलॉग सशक्त समसामयिक, सहज, मार्मिक पीड़ा व अपमान को दर्शाते दृश्य आपको सीट से चिपके रहने को विवश करते हैं। हुनर की कद्र नहीं है; जातीय भेदभाव हावी है। खपरैल के गडढों में से आसमान देखना आसान नहीं, जितना ईंटा गारा डाल खुद को खड़ा करते हैं- लोग दूसरी तरफ से धक्का मार कर गिरा देते हैं। गेंद का असली वजूद हवा में ही है दोस्त, जमीन पर तो बस पड़ी ही रहती है- खुद की कद्र करना स्वार्थ नहीं होता एक दूसरे को चाहने का मतलब यह...
नन्हें साथी
पुस्तक समीक्षा

नन्हें साथी

सुधा गोयल द्वारा लिखित 'नन्हें साथी' पुस्तक की विवेचना समीक्षक :- नील मणि मवाना रोड (मेरठ) *************** अदम्य नारी रत्न सम्मान एवं कोहर प्रसाद पाठक स्मृति बाल साहित्य श्री सम्मान से सुशोभि श्रीमती सुधा गोयल जी का बाल साहित्य-संग्रह नन्हें-साथी मेरे हाथों में होना अपने आप में एक सुखद अनुभव है। १०७ पृष्ठों में सजी ३७ बाल कहानियों की यह पत्रिका बाल मन की दुनिया का ऐसा आईना है, जिसमें बच्चे अपने बचपन की शरारतें, जिज्ञासाएँ और संवेदनाएँ साफ़ देख पाते हैं। एक के बाद एक छोटी, मनोरंजक और दिलचस्प कहानियाँ बच्चों को बाँधे रखती हैं। यह संग्रह केवल मनोरंजन नहीं करता, बल्कि संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और सुसंस्कृत समाज की नींव भी रखता है। पढ़ते-पढ़ते रुकने का मन नहीं होता- हर कहानी अगली कहानी की ओर सहज ही खींच ले जाती है। शब्दों की चंचलता मन मोह लेती है। भाषा सरल, स्पष्ट और कहीं-कहीं हल्...
नई दृष्टि
आलेख

नई दृष्टि

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** जनरेशन जेड (जेन जी) वह पीढ़ी है जिसका जन्म लगभग १९९७ और २०१२ के बीच हुआ है। यह पीढ़ी डिजिटल नेटिव्स कहलाती है क्योंकि वे इंटरनेट और स्मार्टफोन के साथ बड़े हुए हैं और तकनीक के साथ सहज हैं। वे विविधता, सामाजिक न्याय और वर्क लाइफ बैलेंस को महत्व देते हैं। आज जेन जी शब्द हर चर्चा का केंद्र है - विज्ञापन से लेकर शिक्षा नीति तक, हर जगह इसका जिक्र होता है। प्रौद्योगिकी-प्रेमी: जेन ज़ेड के लोग स्मार्टफोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन शॉपिंग जैसी तकनीक के साथ पूरी तरह से सहज हैं। हाल ही में यूट्यूब में एक नई रिपोर्ट पेश की है कि भारत में ६८ फ़ीसदी जेन जी वीडियो से सीखे हुए हाव-भाव और बॉडी लैंग्वेज का इस्तेमाल कर रहे हैं। यूट्यूब आप जेन जी के लिए सिर्फ वीडियो देखने का प्लेटफार्म नहीं बल्कि डिजिटल संस्कृति सीखने और सोशल कनेक्शन का केंद्र बन चुका है। ...
स्वतंत्रता
आलेख

स्वतंत्रता

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** ओशो कहते हैं- जीवन जीने के केवल दो ढंग हैं: एक मालिक बनकर और दूसरा गुलाम बनकर। गुलामी में जिया गया जीवन, जीवन नहीं- केवल समय काटना है। यदि जीना है, तो मालिक बनकर जियो, अन्यथा मर जाना ही बेहतर है। यह कथन कठोर अवश्य लगता है, पर इसमें जीवन का गहरा सत्य छिपा है। मालिक बनने का अर्थ किसी पर शासन करना नहीं है। यह बाहरी सत्ता की नहीं, भीतर की सत्ता की बात है। असली गुलामी बाहर नहीं, हमारे अपने मन में है- आदतों की गुलामी, भय की गुलामी, तुलना की गुलामी, अपेक्षाओं और समाज की राय की गुलामी। मालिक बनने की यात्रा भी मन से ही शुरू होती है। सवाल यह नहीं कि हमें कहाँ पहुँचना है; असली सवाल यह है कि हम कहाँ से शुरू कर रहे हैं- भय से या बोध से। मन के आनंद का स्वाद ही मंज़िल का पता देता है। जिस क्षण व्यक्ति किसी कार्य को करते हुए सहज आनंद अनुभव करता है, उस...
सादगी
कविता

सादगी

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** विश्व हिंदी दिवस १० जनवरी २०२६ पर आयोजित कविता लिखो प्रतियोगिता में सम्मिलित रचना कबीर सा साधारण कौन निपट गंवार अनपढ़ जात-पात से परे गृहस्थी में रहे बुनते रहे कपड़े छोड़ा कुछ नहीं पाया सब कुछ नहीं विशिष्टता कोई जान लिया आत्मिक सौंदर्य सादगी को साधते रहे राम चदरिया कातते रहे। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे ...🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवा...
नववर्ष की दस्तक
कविता

नववर्ष की दस्तक

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** पुराना साल विदा ले गया अनकही सीखें दे गया कुछ आँसू कुछ मुस्कान जीवन का नया विधान। नववर्ष आया द्वार खड़ा आँखों में सपनों की धूप कहता है- चलो फिर से लिखें अपने कल का सुंदर रूप। बीते कल की भूलों से अब लेना है बस ज्ञान कड़वाहट को छोड़ चलें मन में भर लें विश्वास। हर दिन हो थोड़ा बेहतर हर रिश्ता कुछ और गहरा मेहनत सच्चाई करुणा से सजाएँ भविष्य का सवेरा। नववर्ष नहीं केवल तारीख यह तो उत्सव संकल्पों का रोज थोड़ा अच्छा करना- बस यही संदेश नववर्ष का। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक ...
टन टन टन
लघुकथा

टन टन टन

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** गुप्ता जी रोज़ की तरह आज भी अख़बार में घुसे थे, गुप्ता जी की आदत थी जब तक घड़ी ९:०० न बजाए, अखबार से चिपके ही रहते थे। आज भी घड़ी ने जैसे ही नौ बार पुकारा, गुप्ता जी झट तौलिया उठा, लपड़ धपड़ बाथरूम की ओर लपके। धड़ाम!!! अचानक आंगन से ज़ोरदार आवाज आई। रीना, जो किचिन में नाश्ता और टिफिन की जुगलबंदी में लगी थी, घबराकर दौड़ी। बाहर आकर जो नज़ारा देखा तो हँसी रोकना मुश्किल हो गया। आंगन में गुप्ता जी बड़े शाही अंदाज़ में फ़िसले पड़े थे। उनका भारी-भरकम शरीर, टेढ़ा-मेढ़ा होकर जमीन पर ऐसा पसरा था मानो किसी मूर्तिकार का बड़ा सा अनगढ़ अधूरा शिल्प। रीना ने होंठ दबाकर हँसी छुपाई, फिर गंभीर आवाज़ में बोली - "क्या ढूँढ रहे हो गुप्ता जी? धरती के अंदर छिपा खज़ाना या बाथरूम का शॉर्टकट?" खिसियाते गुप्ता जी अब कराहते हुए बोले - "अरे रीना… ये फर्श बड़ा धो...
गर्व
कविता

गर्व

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** धरा आज गर्व से इठलाई बेटियां विश्व कप ले आईं भारत ने फिर दिवाली मनाई हमनप्रीत ने की टीम अगुआई शिकस्त दे दक्षिण अफ्रीका को विश्व विजेता टीम कहलाई। शेफाली की धुआंधार बल्लेबाजी दीप्ति शर्मा की तूफानी गेंदबाजी देख कप्तान वाल्वर्ट टीम लड़खड़ाई देख कप्तान वाल्वर्ट टीम लड़खड़ाई दीप्ति ने पांच विकेट चटकाई २४६ रन पर हुए सब धराशाई सात बार विजयी ऑस्ट्रेलिया टीम बुलंद हौसले से हराई गूंज रही आज हर दिल शहनाई। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।...
मैं सौमित्र
पुस्तक समीक्षा

मैं सौमित्र

सुधा गोयल द्वारा लिखित उपन्यास ‘मैं सौमित्र’ की समीक्षा लेखक :- नील मणि मवाना रोड (मेरठ) *************** विदुषी, प्रबुद्ध, सुविख्यात लेखिका श्रीमती सुधा गोयल जी ने अपने उपन्यास ‘मैं सौमित्र’ में रामचरित मानस के पात्रों का ‘मानवीकरण चिंतन’ कर वाकई साहस पूर्ण कृत्य किया है। प्रस्तुत हैं उपन्यास के कुछ अंश- मर्यादा पुरुषोत्तम राम का अनुज लक्ष्मण इतना दीन हीन कैसे हो सकता है? जिसकी अपनी कोई इच्छा ना हो। बच्चे का स्वभाव अक्सर अपने जन्म दाता अर्थात माता पिता के ऊपर जाता है। यानी दशरथ और सुमित्रा। क्या सुमित्रा वास्तव में राजपुत्री थी या दासी? इस किताब की खोज यहाँ से प्रारंभ हुई। राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया और अग्निदेव स्वयं खीर लेकर प्रकट हुए। कौशल्या, केकैयी राजा को प्रिय थी। इसी से आधी खीर कौशल्या को दी। तदनंतर सुमित्रा आ गई। तो बची खीर के दो भाग कर एक केकैयी को दिया। फिर बची...
चूहा दौड़
कविता

चूहा दौड़

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** घर-घर त्रस्त माता-पिता ग्रस्त रिश्ते ध्वस्त सपना त्यागे पल-पल जागे अच्छी परवरिश को सब सुख के त्यागे बच्चे युवा हुए कभी खुश कभी खफा हुए कामनाएं जगीं मोह, अहंकार पंख पसारे भय, भ्रम के मारे कच्चे अनुभवहीन बच्चे विचारों की गहराई क्या जाने माता-पिता से उलझ उनकी सहनशीलता क्षमाशीलता की सीमा लांघें। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाई...
पौराणिक सच- हमारे पुराणों का सच
पुस्तक समीक्षा

पौराणिक सच- हमारे पुराणों का सच

सुधा गोयल द्वारा लिखित 'पौराणिक सच' पुस्तक की विवेचना लेखक :- नील मणि मवाना रोड (मेरठ) *************** हिंदू धर्म में वर्णित १८ महा पुराणों (एक पुराण लगभग ७००-१००० पेज) के गहन अध्ययन के बाद लेखिका श्रीमती सुधा गोयल जी ने "पौराणिक सच" नामक किताब में अलंकारिक व शुद्ध साहित्यिक हिंदी भाषा में कुछ चमत्कृत व हैरान कर देने वाले तथ्य चुन चुन कर कहानी के रूप में पाठकों की थाली में परोसे हैं। सन २०२२ में ‘नमन प्रकाशन’ नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित "पौराणिक सच" की कहानियां को पढ़ने के बाद पुराणों में वर्णित पाठ्य सामग्री की झलक स्पष्ट हो जाती है। मेरी तमन्ना रही थी कि कुछ पुराणों का अध्ययन करूं, जो "पौराणिक कथाओं का सच" जानकर काफी हद्द तक तृप्त हो गई है। पुराणों में देवताओं की भोग, छल कपट व ईर्ष्या की प्रवृत्ति सर्वत्र वर्णित है। लेखिका ने पौराणिक सच की भूमिका में साहसिक तौर पर लिखा है कि प...
मैं बनाम तुम
कविता

मैं बनाम तुम

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** इंस्टेंट मैगी सा रिश्ता क्यों हो गया इतना सस्ता सरे बाजार जुड़ता है फिल्मों सा जलवा बिखेरता है चंद लम्हों की चमक-दमक दिखा सिमटने लगता है दो परिवारों का विश्वास चंद पलों में दरकने लगता है। कहां गया वो अपनापन, समर्पण, त्याग… रिश्ता निभाने का वो भाव, एक टीम का सुविचार, हमारे फैसले, हमारा अधिकार हमारी खुशी, हमारा घर, हमारे बच्चे ‘हम तुम अपने’ क्यों ‘स्व’ बदला अहम् में, आया एहसान, त्याग का हिसाब असंतोष, ईर्ष्या, आक्रोश व बहिष्कार का विचार विद्रूप और हिंसक, क्रोध भरा अहंकार। कल्पना लोक में विचराते मीडिया के झूठे इश्तहार बच्चों को बहकाते नकारात्मकता ओढ़ाते विवेकशीलता का संतुलन डगमगाते रिश्तों में षड्यंत्र की दरारें डलवाते ये इश्तहार वास्तविकता पहचानें कल्पना लोक से उबरें ना भटकें बने होशियार। परिचय :- नील मणि...
स्वीकार
कविता

स्वीकार

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** स्वयं को स्वीकार कर तो देखो चित्त को साध कर तो देखो मन की लगाम थाम कर तो देखो गुण अवगुण स्वीकार कर तो देखो ना चोर कहे मैं चोर ना हिंसक कहे मैं हिंसक ना क्रोधी कहे मैं अक्रोधी ना निकम्मा कहे मैं लुल गंदगी छिपे ना इत्र छिड़काने से छिपे रोग को उजागर कर तो देखो स्वीकार लो सत्य को खुलकर बह जाकर तो देखो ज्ञान रोशनी है मन के अंधेरे तक पहुंचा कर तो देखो। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्र...
अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस
कविता

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस

नील मणि मवाना रोड (मेरठ) ******************** संयुक्त परिवार सबका, सबके लिए वैश्विक आवाहन परिवार गौरव, सुरक्षा, एकता का पवित्र आलिंगन जीवन की पहली श्वास को गर्माहट भरा चुंबन हर आंसू का आश्रय गृह, विश्वास और रंजन सपनों को संस्कारों के पंखों की उड़ान का सृजन रिश्तों के स्नेहिल धागों में लिपटा प्यारा आचरण परिवार, समाज, संस्कृति, राष्ट्र प्रगति का जागरण समय, संवाद, समर्पण के महत्व का अनोखा मंच व सिंचन। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्र...
बदलाव
कविता

बदलाव

नील मणि मवाना रोड, (मेरठ) ******************** किसी को बदलने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए हां अगर चाहें तो कोशिश करें स्वयं में कुछ परिवर्तन जरूर ला सकते हैं दूसरों के अनुकूल स्वयं को बना सकते हैं स्थिति में संतुलन बैठ सकते हैं दो विपरीत दिशाओं को मिला सकते हैं कोशिश जरूर करनी चाहिए बंधने में ही सार्थकता है टूटना अंतहीन है, दुखद है अपने लिए तो सभी जीते हैं किसी और के लिए भी जी कर देखना चाहिए। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है। आप भी अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपने परिचय एवं छायाचित्र के साथ प्रकाशित करवा सकते हैं, राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि ...
माँ- एक सुखद अनुभूति
कविता

माँ- एक सुखद अनुभूति

नील मणि मवाना रोड, (मेरठ) ******************** चाँद तारों सा बचपन चाँद तारे हो गया मां जब से दूर हुई बचपन खो गया फ्रॉक से लेकर साड़ी तक खूब सजाया तुमने लाडली के हर आंसू पर स्नेहांचल फैलाया तुमने कुछ बन जाऊं मैं रोज सवेरे जगाया तुमने सफेद कोट बुन डॉ. ख्वाबों में बनाया तुमने कभी मलाई आम तो कभी मालपुए का स्वाद चखाया तुमने हर क्षेत्र में प्रवीण हो लाडली हर दांव चलाया तुमने जब भी उदास मन हुआ शोहदों की शरारतों से 'देखने की चीज हो तुम' कह विश्वास जगाया तुमने अंजाने में दिए मेरे दुख को, कण्ठ भी उतारा तुमने अपनी परी के हर एहसास को गले लगाया तुमने नाज है मां तुम पर.. तुम्हारी स्नेहाशीष सीखों पर आज आश्वस्त हूँ इसीलिए माँ, मैं अपने आप पर। परिचय :- नील मणि निवासी : राधा गार्डन, मवाना रोड, (मेरठ) घोषणा : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौल...