श्री पार्वती शक्ति तांडव स्तुति
बाल कृष्ण मिश्रा
रोहिणी (दिल्ली)
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जयति महाशक्ति स्वरूपा,
शिव-हृदय-विहारिणी,
प्रलय-काल-नृत्यातुरा,
दनुज-वंश-विदारिणी।
डमरू-ध्वनि-संग थिरकती,
चरण-चाप-कंपित-धरा,
त्रिलोकी-वंदिता माता,
आदि-शक्ति करुणामयी, जगदुद्धरा।
रण-चंडी रूप धरे,
नयन-अग्नि झलकावती,
मुंडमाल कंठ सोहे,
खड्ग-हस्त चमकावती।
तांडव-लय-बद्ध पग,
घुँघरू रुनझुन बाजत,
भक्त-रक्षण-हेतु माँ,
विकराल रूप साजत।
सौम्य रूप गौरी तुम,
तुम्हीं महाकाली विकट,
शरण आए भक्त के,
संकट हरतीं तुम तुरंत।
सृष्टि-स्थिति-विनाश की,
तुम्हीं आद्या मूल हो,
नमन तुमको जगदंबे,
तुम ही सिद्धि-अनुकूल हो।
हुंकार उग्र प्रचंड माते!
शत्रु-दल थर-थर काँपता,
तेज ओजस्वी देख तेरा,
काल भी पग नापता।
अरि-कंठ-विदारण खड्ग चमके,
असुर-मस्तक डोलते,
जो बढ़े सुत की ओर कुदृष्टि,
प्राण उसके बोलते।
परम पावन सौम्य गौरी!
अंच...

