एक युग, एक विचार
रूपेश कुमार
चैनपुर (बिहार)
********************
ग्वालियर, मध्यप्रदेश की पावन धरा ने
जन्म दिया एक बालक को, नाम हुआ अटल,
स्वरों में कविता, शब्दों में सत्य,
वाणी थी सरल, मन प्रखर, अडिग, स्थिर, निर्मल।
पिता शिक्षक संस्कारों की छाया,
माँ की ममता, राष्ट्र का स्वप्न,
बाल्यकाल से ही चेतना जागी,
भारत बने विश्व में उज्ज्वल स्वर्ण-रत्न।
कलम उठी तो कविता बह चली,
राजनीति आई तो सेवा बन गई,
विचारों में मतभेद रहे होंगे,
पर मर्यादा कभी न टूटी, न झुकी, न गई।
जनसंघ से संसद तक की यात्रा,
संघर्षों से रचा हुआ इतिहास,
एक नहीं, कई बार पराजय मिली,
पर हर हार बनी भविष्य का प्रकाश।
“हार नहीं मानूँगा” कहने वाला,
स्वयं उस पंक्ति का प्रमाण था,
लोकतंत्र का सच्चा प्रहरी वह,
विपक्ष में भी जिसकी वाणी समाधान था।
तीन-तीन बार बने प्रधानमंत्री,
पर सत्ता कभी सिर पर न चढ़ी,
सरल ज...






