कोई पूछे तो धन्यवाद ना पूछे तो प्रसाद
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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कोई पूछे तो धन्यवाद, ना पूछे तो समझो प्रसाद,
सेवा का सच्चा सुख मिले, बस इतना ही है इराद।
मनुष्य जिए अपने लिए, स्वस्थ रहे, सुखी रहे,
दिखावे की चादर ओढ़े क्यों, सच मन में ही रुके रहे।
सेवा यदि की निस्वार्थ भाव से, फल उसका तुम पाओगे,
तालियाँ चाहे कम मिलें, भीतर दीप जलाओगे।
प्रशंसा की प्यास छोड़ दो, कर्म को ही साथी मान,
जो बोओगे वही उगेगा, यही है जीवन का विधान।
जो करते हो स्वयं के सुख को, वही सच्चा उत्सव है,
बिना दिखावे का जीवन ही, सबसे बड़ा अनुभव है।
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेर...

