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कटु सत्य

वीणा वैष्णव
कांकरोली

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लोग मुँह मिश्री घोल, आजकल यूं बोला करते हैं।
मुँह राम बगल में छुरी, कहावत चरितार्थ करते हैं।।

महकते हैं फूलों की तरह, खुशबू मिलावट रखते हैं।
पत्तों सी कोमलता नहीं, स्पर्श दर्द दिया करते हैं।।

बातें लच्छेदार कर, वो ऐसे बात करामात रखते हैं ।
मिले जब भी खबर, नमक मिर्च लगा पेश करते हैं।

गुनाह करते हैं बहुत, पर शर्म नहीं किया करते हैं।
यह कलयुग, ऐसे लोग ही मजे से जिया करते हैं।।

सच बोलने वाले, सदा ही गुनहगार बना करते हैं।
झूठ बोलने वाले, एकछत्र चहुँओर राज करते हैं।।

सौ सुनार एक लुहार, कहावत प्रभु यथार्थ करते हैं।
जवानी में किया गुनाह, सजा वो बुढ़ापे में पाते हैं।।

प्रभु घर देर अंधेर नहीं, हकीकत नहीं समझते हैं।
करते हैं हिसाब सब बराबर, उधार नहीं रखते हैं।।

कह रही वीणा, ये मनु फिर क्यूं नहीं संभलते हैं।
अपने संग अपनों का भी, जीवन बर्बाद करते हैं।।

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परिचय : कांकरोली निवासी वीणा वैष्णव वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय फरारा में अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कवितायें लिखने में आपकी गहन रूचि है।


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