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सफर जिंदगी का

प्रीतम कुमार साहू
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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खुद की लडाई खुद को लड़ना पड़ता है,
राहें कठिन हो फिर भी चलना पड़ता है..!!

थम जाने में नहीं है अस्तित्व किसी का,
अस्तित्व बचाने के लिए चलना पड़ता है..!!

कभी दूर तो कभी पास रहना पड़ता है,
कभी मिलना, कभी बिछड़ना पड़ता हैं..!!

कभी कुछ पाना तो कभी खोना पड़ता है,
कभी हँसना तो कभी रोना पड़ता है..!!

खुशियाँ और गम तो आएंगे जिंदगी में,
कभी ख़ुशी, तो कभी गम सहना पड़ता है..!!

कभी टूटना तो कभी जुड़ना पड़ता है,
कभी चलना तो कभी रुकना पड़ता है..!!

परिंदों कि तरह हर सुबह जगना पड़ता है,
सूरज कि तरह हर शाम ढलना पड़ता है..!!

जिंदगी की सफर में रोज़ निकलना पड़ता है
मोड़ आए राहों में तो मुड़ना पड़ता है..!!

परिचय :- प्रीतम कुमार साहू (शिक्षक)
निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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