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आँखों की नमी

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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मैं आँखों के किनारों पर
अटकी हुई नमी हूँ
जो बाहर की दुनिया
से अंजान हूं
अन्दर सिमटना
नहीं चाहती
लेकिन भीतर के
किनारों में कोई जगह
अब बची नहीं
खामोश हूँ कोई
स्पन्दन नहीं मुझमे
सारे रिश्ते नाते वहां
जमा चुके हैं अपना डेरा
आंसू इन रिश्तों की
जकड़न से थरथरा रहे हैं
दहलीज के दरवाजे
बंद हो रहें हैं
उस से जगह छोड़ने को
कह रहे हैं
बूँदों का अस्तित्व
नमी में समा रहा है
नयनों की नमी अब
परिपूर्ण हो रही है.!!

परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार)
निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
विशेष : साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के शौक ने लेखन की प्रेरणा दी और विगत ६-७ वर्षों से अपनी रचनाधर्मिता में संलग्न हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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