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मानवाधिकार दिवस: स्वतंत्रता समानता और न्याय का संदेश

 दिव्याना
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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 मानवाधिकार दिवस प्रत्येक वर्ष १० दिसंबर को विश्व भर में मनाया जाता है यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा १९४८ में अपनाई गई सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र की याद दिलाता है, जो सभी मनुष्यों को जन्मजात अधिकार प्रदान करता है ,जिसमें ३० अनुच्छेदों के माध्यम से जीवन, गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद न्याय की शुरुआत:
द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहताओं, जैसे होलोकॉस्ट और नरसंहार, ने वैश्विक स्तर पर न्याय की नई व्यवस्था की मांग को जन्म दिया। मित्र राष्ट्रों-अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और सोवियत संघ ने १९४५ में नूर्नबर्ग में अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण (IMT) की स्थापना की, जो युद्ध अपराधियों को व्यक्तिगत रूप से दंडित करने का पहला मॉडल बना। इन मुकदमों ने १९४८ में संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा-पत्र की नींव रखी, जो व्यक्तिगत गरिमा और समानता पर आधारित न्याय प्रणाली का प्रतीक बनी। नूर्नबर्ग सिद्धांतों को संयुक्त राष्ट्र ने बाध्यकारी कानून माना, जिससे अंतरराष्ट्रीय अपराधी अदालत (ICC) जैसे संस्थानों का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह शुरुआत आधुनिक मानवाधिकार युग की नींव साबित हुई।
मानवाधिकार दिवस: ३० अनुच्छेदों का सार:
मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा-पत्र में ३० अनुच्छेद हैं जो सभी मनुष्यों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा प्रदान करते हैं। अनुच्छेद १ हर व्यक्ति को जन्म से समान अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 3 जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा की गारंटी करता है। ये अधिकार भेदभाव, गुलामी और यातना से मुक्ति सुनिश्चित करते हैं।
प्रमुख अनुच्छेदों की सूची:
अनुच्छेद १-५: स्वतंत्रता, समानता, जीवन का अधिकार, गुलामी और यातना से मुक्ति।
अनुच्छेद ६-१२: कानूनी मान्यता,
समान संरक्षण, गोपनीयता और निष्पक्ष सुनवाई।
अनुच्छेद १३-१७: आवागमन स्वतंत्रता, शरण, राष्ट्रीयता, विवाह और संपत्ति का अधिकार।
अनुच्छेद 18-24: विचार धर्म स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति, सभा, रोजगार और अवकाश।
अनुच्छेद २५-३०: जीवन स्तर, शिक्षा, सांस्कृतिक भागीदारी और समुदाय कर्तव्य।
मानवाधिकार दिवस २०२५ की थीम :
मानवाधिकार दिवस २०२५ की आधिकारिक थीम “मानवाधिकार, हमारी दैनिक आवश्यकताएं” (Human Rights, Our Everyday Essentials) है। यह थीम मानवाधिकारों को रोजमर्रा के जीवन का अभिन्न अंग बताती है, जैसे सुरक्षा, सम्मान, समानता और स्वतंत्रता, जो हर व्यक्ति की मूलभूत जरुरत हैं।
“मानवाधिकार हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है; इनकी रक्षा हम सबकी साझा जिम्मेदारी। आइए, एक न्यायपूर्ण समाज का संकल्प लें।” “समानता का सपना साकार हो, जब हर दिल में न्याय का दीप जले। मानवाधिकार दिवस हमें प्रेरित करे, भेदभाव को मिटाने को।” “जैसा नेल्सन मंडेला ने कहा, ‘कोई भी स्वतंत्र नहीं है जब तक सभी स्वतंत्र न हों।’ यह दिवस हमें एकजुट होने का संदेश देता है।”

परिचय :-  दिव्याना
शिक्षा : ११वीं कक्षा की छात्रा राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां
निवासी : कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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