
विजय गुप्ता “मुन्ना”
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
द्वेष कलंकित दंश योजना धर्म पूछकर कत्ल करे।
खुला खेल फर्रुखाबादी धर्म विरोधी जहर भरे।
अनुभव सिंदूर बतला गया, बदला लेना झांकी है।
ताकत देश की पहचान लो, असला मसला बाकी है।
ड्रोन रॉकेट पिनाकी देख, शत्रु सांस अटकी देखो।
राफेल व्याख्या सफल यात्रा, देखदेख कर भी भटको।
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
नेता मंत्री संत जनों से, बिगड़ी बोली स्वाद चखा।
मांगी किसी ने कभी माफी, बोला कोई बोल यथा।
अनोखा कुंभ पुण्य देखने, रोग विपक्षी खेला था।
पैंतालिस दिन छासठ करोड़, अदभुत धर्मी मेला था।
लोकतंत्र के भव्य भवन में, छद्म भेष कितना परखा।
राष्ट्र ताकत सम्मान गर्व, महिमा शान क्या चक्खा।
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
पांच सदी साहस गाथा से, राम लला घर को आए।
निर्माण संग धर्म विजय ध्वज, शान बान से लहराए।
सनातन रीति प्रतिपालन से, मिली चोट ही भारी थी।
विधान विरोधी ठप्पे से फिर, वोट मांगने बारी थी।
निज घर में ही फूट पड़े पर, सत्ता मद हमेशा ताको।
अपनी गलती गोल हुआ तो, भूल जान बकबक आंको
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
रीतिनीति को डर दिखलाना, शासन करना कारण था
हर घटना में कलमकार का, होश जोश उच्चारण था।
लेखन प्रभाव से मारण तारण, व्यर्थ कर्म से मुक्त हुई।
सबके हित का साहित्य सही, गपशप किंचित हवा हुई
भविष्य गढ़ता नव वर्ष सदा, आकलन हो तैयार भी।
जो भी सोचा कितना पाया, प्रयास कदम सवार सभी।
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
एक छोर सम्मान प्रतिष्ठा में छाती चौड़ी होती है।
पर साजिश के अपमानों से, भारत माता रोती है।
एक साल की बैलेंस शीट कभी बनाकर तो देखो।
स्वयं से लेकर राष्ट्र तलक विकास गाथा भी झांको।
परिचय :- विजय कुमार गुप्ता “मुन्ना”
जन्म : १२ मई १९५६
निवासी : दुर्ग छत्तीसगढ़
उद्योगपति : १९७८ से विजय इंडस्ट्रीज दुर्ग
साहित्य रुचि : १९९७ से काव्य लेखन, तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल जी द्वारा प्रशंसा पत्र
काव्य संग्रह प्रकाशन : १ करवट लेता समय २०१६ में, २ वक़्त दरकता है २०१८
राष्ट्रीय प्रशिक्षक : (व्यक्तित्व विकास) अंतराष्ट्रीय जेसीस १९९६ से
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
प्रिय मित्र, शुभचिंतक एवं परिवारजन आप सभी को नववर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है इस अवसर पर आप को प्रेषित मेरी नई स्वरचित रचना लिंक को टच कर पढ़ने का कष्ट कर प्रोत्साहित करेंगे एवं कमेंट बॉक्स में अपने विचार रख कविता को लाइक करेंगे …🙏🏻😊💐💐💐 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच पर अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, आदि प्रकाशित करवाने हेतु अपनी कविताएं, कहानियां, लेख, हिंदी में टाईप करके हमें hindirakshak17@gmail.com पर अणु डाक (मेल) कीजिये, अणु डाक करने के बाद हमे हमारे नंबर ९८२७३ ६०३६० पर सूचित अवश्य करें …🙏🏻 राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच का सदस्य बनने हेतु अपने चलभाष पर पहले हमारा चलभाष क्रमांक ९८२७३ ६०३६० सुरक्षित कर लें फिर उस पर अपना नाम और कृपया मुझे जोड़ें लिखकर हमें भेजें…🙏🏻












