समय का पन्ना
विजय गुप्ता "मुन्ना"
दुर्ग (छत्तीसगढ़)
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बुढ़ा बच्चा स्वभाव सरीखा अक्सर हम सुनते आए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।
रट्टू तोता जैसा डायलॉग रोज कोई दोहराता है।
गिनी चुनी सोच प्रशंसा लाभ जग को सुनवाता है।
जागो उठो सुनो सभी ट्रंप चाल का भय दिखलाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।
दुनिया लोहा मान समझौता रूप स्वीकार किया।
फिर धीरे से आँख दिखा छवि में बट्टा लगा दिया।
झेंप खीझ बेचैनी मिटाने फर्श पे ही लुढ़कते जाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।
बरसों बरस की साख मिटती कैसे दुनिया ने जाना।
जल थल नभ अंतरिक्ष शक्तिमान का बहक जाना।
एक खिलौना खेलने बच्चे को ट्रंप इक्का ललचाए।
जिद और अकल दोनों अब अंबर तक उड़ते जाए।
रट्टू तोता कुछ तय शब्दों से अपनी शान दिखाता।
अपनी बोली में फिर निज उर बोली भी फिसलाता।
समर्थ राष्ट्र अर्थ तंत्र शस्त्र प्रगति...

