
प्रो. डॉ. दीपमाला गुप्ता
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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💐💐आप सभी को अंतर्राष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं, नमस्कार🙏🏻🙏🏻😊
आज अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस हैं, यूं तो सभी दिवस एक विशेष आवरण लिए होते ही हैं, लेकिन दिवस को मानना एक बाध्यता और उदासीनता की और इशारा करता हैं, जो हमें अपनी हिंदी भाषा के प्रति जागरूक और सजग होने के लिए भी प्रेरित करता हैं, तो आइए आज हिंदी के बारे में बात करके हिंदी पर भी हम चार चांद लगाते हैं, ऐसा लगता हैं, हिंदी को हम भारतीयों को छोड़कर कोई भी दोयम दर्जे की नहीं मानता हैं , सिर्फ हमें विश्वास करने की आवश्यकता हैं कि हिंदी आज भी वैश्विक तौर पर जानी मानी भाषा मानी जाती हैं, और भारत में तो हिंदी को भी महिलाओं की तरह दोयम दर्जा ही प्राप्त हैं, बहुत कोशिशें होती हैं, हिंदी पखवाड़ा, हिंदी दिवस कार्यक्रम, सेमिनारों, संगोष्ठियों को रखकर हिंदी को प्रथम दर्जा दिए जाने का पूरा भरसक प्रयास किया जाता हैं, लेकिन फिर भी वही ढाक के तीन पात। हम सभी फिर भी विश्व हिंदी दिवस को मनाते हैं, और स्वयं को शाबाशी भी दे देते हैं की हम अपनी भाषा का सम्मान करते हैं और उस पर अभिमान भी करते हैं, खैर एक किस्सा साझा करना चाहूंगी, कुछ दिनों पहले एक हिंदी के प्रोफेसर से मिलना हुआ, बातों बातों में उन्होंने बताया की उनका बेटा किसी अंग्रेजी समाचार पत्र में कार्यरत हैं, अंग्रेजी पर जोर देकर, चार बार समाचार पत्र का नाम लेना और अंग्रेजी को लेकर उनकी गर्वानुभूति को उनके चेहरे पर में पढ़ पा रही थी, और अंदर ही अंदर सोच रही थी, की हिंदी का प्रोफेसर होने के बावजूद हिंदी को लेकर इतना कमतरी का भाव क्यों हैं, हम भारतीयों ने खुद अंग्रेजी को महारानी भाषा बना दिया हैं, जगह-जगह खुले अंग्रेजी कोचिंग इस बात का खुला सबूत हैं, कहीं आपने देखा की शुद्ध हिंदी बोलना और लिखना सीखिए का कहीं बोर्ड भी लगा हो, खैर ये एक छोटा सा किस्सा हैं, ऐसे बहुत से अनुभव हिंदी भाषा को लेकर और उसे कमतर बताने वाले किस्सों से आमना सामना हुआ हैं।
आज विश्व भर में हिंदी का विकास बहुत तेजी से हो रहा हैं, और हिंदी दुनिया की सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक बन गई हैं , शिक्षा हो या व्यापार या तकनीक, इंटरनेट के कारण इसका दायरा भारत से निकलकर १३२
से अधिक देशों तक फैल गया हैं , हिंदी दुनियाभर में लगभग ६० करोड़ लोग हिंदी भाषा को बोलते और समझते हैं और डिजिटल रूप से स्वीकार होने के कारण हिंदी भाषा अमेरिका, कनाडा और यूके जैसे भारतीय मूल के लोगों की वजह से हिंदी भाषा का दायरा विस्तृत हो चुका हैं। तकनीकी विकास ने हिंदी के प्रयोग को आसान बनाने के साथ ही इसे डिजिटल युग की भाषा भी बना दिया हैं, भारत का सांस्कृतिक प्रभाव भी हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में विशेष रूप से योग, आध्यात्म और हिंदी साहित्य के लिए वैश्विक रुचि ने हिंदी एक सम्मानजनक स्थान भी दिया हैं।
एम. बी. बी. एस. और एम. बी. ए. जैसी प्रोफेशनल डिग्रियां भी अब हिंदी भाषा में ली जा सकती हैं, जो हिंदी को उचित मान सम्मान और बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं, भारत सरकार भी विदेश मंत्रालयों और राजभाषा विभाग विदेशों में हिंदी को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं, संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर विश्व हिंदी दिवस को मनाया जाता हैं, जो इसकी वैश्विक भाषाई महत्ता को दर्शाता हैं।
हिंदी को अब हम सिर्फ भारतीय भाषा ही न माने, यह एक वैश्विक मान्यता प्राप्त भाषा बन गई हैं जो न सिर्फ देशों को जोड़ रही हैं बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से सांस्कृतिक विकास की एक नई धारा को प्रवाहित कर रही हैं, अब केवल हिंदी को लेकर इतना ही, की हाय, हेलो को छोड़कर नमस्कार, नमस्ते को अपनाना भी हिंदी को एक बड़ा सम्मान और स्थान देना माना जाएगा।🙏🏻😊
अंत में केवल इतना ही :
“वर्णों की वाणी, संस्कारों की शान, हिंदी में बसता हैं, भारत का अभिमान।
शब्दों की शक्ति, भावों की रीत, हिंदी हैं विश्व की, पहचान हैं प्रीत”
प्रो.डॉ. दीपमाला गुप्ता
प्रधान सम्पादक : hindirakshak.com
निवासी : इंदौर मध्य प्रदेश
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