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नया सृजन

प्रेम नारायण मेहरोत्रा
जानकीपुरम (लखनऊ)
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राम जी कृपा से मिला है ये तन,
नाम सुमिरन में इसको लगा दीजिए।
जग के कार्यों के संग नाम जपते हुए,
अपनी आत्मा को निर्मल बना लीजिए।
राम जी की …

प्रभु ने दी श्रेष्ठ योनी है मुक्ति के मित,
तू भी करले जतन, इसमें ही तेरा हित।
प्रभु की किरपा को सार्थक बनाने के मित,
नाम सुमिरन में मन को रमा लीजिए।
राम जी की…

तेरे पूर्व सत्कर्मों का फल है ये तन,
इसका उद्देश्य पूर्ति का साधन तू बन।
नहीं मालूम फिर अवसर मिले ना मिले,
राम सांसों में अपनी बसा लीजिए।
राम जी कृपा…

तेरे सत्कर्म पितरों को भी भाएंगे,
तुझको अन्तर का आशीष दे जाएंगे।
तुझको पितरों के ऋण से मुक्ति पाना तो,
नाम सुमिरन और लेखन में रम जाइए।
राम जी की कृपा…

परिचय :- प्रेम नारायण मेहरोत्रा
निवास : जानकीपुरम (लखनऊ)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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