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सुरता करन वीर जवान ल

प्रीतम कुमार साहू ‘गुरुजी’
लिमतरा, धमतरी (छत्तीसगढ़)
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(छत्तीसगढ़ी बोली)

आजादी के खातिर जेन,
दे दीस अपन पऱान ल.!
आवव संगी सुरता करन,
ऐसन वीर जवान ल..!!

घर दुवार ला छोड़,
भारत भुइयाँ के गुन गाथे..!
सरदी, गरमी, बरसा सहिके,
दुसमन ल मार भगाथे..!!

भारत भुइयाँ के माटी म,
आँच नइ आंवन देवय!
गोली खाथे छाती म,
तिरंगा ल झुकन नइ देवय!!

दाई ददा के इकलौता बेटा,
देस के काम आइस हे.!
आजादी बर लड़िस लड़ाई,
अपन लहूँ बोहाइस हे!!

लहूँ देके जेन हर अपन,
भुइयाँ के मान बढ़ाइस हे!
अंग्रेज मन ल धुररा चटाके,
देस आजाद कराइस हे!

आजादी के लड़ाई म संगी,
कतको मुढ़ी कटाइस हे
तभे जाके भारत भुइयां,
आजाद भारत कहलाइस हे

परिचय :- प्रीतम कुमार साहू, गुरुजी (शिक्षक)
निवासी : ग्राम-लिमतरा, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़)
घोषणा पत्र : मेरे द्वारा यह प्रमाणित किया जाता है कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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