
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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आप गलती करके सुन रहे हैं तो आप ऑफिस में हैं, और अगर आप बिना गलती के सुन रहे हैं तो आप निश्चय ही घर पर हैं। दुनिया की हर चीज ठोकर लगने से टूट जाती है, लेकिन कामयाबी एक ऐसी चीज है जो कि ठोकर खाकर ही मिलती है। गरीब मांगे तो भीख, अमीर मांगे तो चंदा, करोड़पति मांगे तो डोनेशन और अरबपति मांगे तो सब्सिडी। यहाँ सभी लोग अपने हिसाब से भीख मांगते हैं। मुहुर्त के चक्कर में मत पड़िए, बिना मुहुर्त के पैदा होकर जीवनभर ‘शुभ मुहुर्त’ के चक्कर में फंसा इंसान एक दिन बिना मुहुर्त के प्राण त्याग देता है। पुरूष की आदत होती है हमेशा महिलाओं के बीच घुसने की, इसलिए शायद ‘फीमेल’ शब्द में ‘मेल’ आता है और ‘वुमेन’ में ‘मेन’ आता है।
झूठ बोलने से पाप लगता है और सच बोलने से आग। अब आप ही बताइए, आप क्या बोलेंगे ? जिसका कोई नहीं होता, उसका खुदा होता है, यह पुरानी बात है। उसका मोबाईल होता है, और जिसका मोबाईल होता है, वो किसी का नहीं होता। आजकल तरक्की इतनी हुई है कि हजारों किलोमीटर दूर बैठे इंसान को देख और सुन सकते हैं, और पतन इतना हुआ है कि पास बैठे इंसान का दु:ख, दर्द और तकलीफ दिखाई नहीं देता। आपको मालूम है कि मैं शतरंज क्यों नहीं खेलता, क्योंकि दुश्मन को मैं सामने बैठाता नहीं और दोस्त के साथ चाल चलना मुझे आता नहीं है।
एक मुर्गी के बच्चे ने अपनी माँ से पूछा, “माँ इंसान पैदा होते ही अपना नाम रख लेते हैं। हम लोग ऐसा क्यों नहीं करते हैं ?” माँ ने कहा, “बेटा हमारी बिरादरी में नाम मरने के बाद रखा जाता है, जैसे-चिकन टिक्का, चिकन चिली, चिकन तंदूरी, चिकन मलाई, चिकन दो प्याजा।” आप कितना भी ज्ञानियों के साथ बैठो, तर्जुबा बेवकूफ बनने के बाद ही मिलता है। वक़्त भी अजीब है। खुद दिखता नहीं, दिखा सब-कुछ जाता है। समय-समय की बात है, कल जिस धूप से जलन होती थी, आज उसी से सुकुन मिलता है। हमारी बस एक जीभ ही थी, जिसमें आलस ना था। मोबाइल आने के वाद वो भी चुपचाप बैठी है। मेहनत का फल मीठा होता है, इसलिए ‘शुगर’ की बीमारी से बचने के लिए मेहनत भूलकर भी ना करें। अच्छा हुआ सारे देवी-देवता भारत में ही हैं, वरना बीबियाँ कहती-लंदन वाले वाले भैरो बाबा पर मन्नत पूरी करने जाना है। गरीबी वह तेजाब है, जिसमें खून के रिश्ते भी जल जाते हैं और पैसा वह चुम्बक है, जो दुश्मनों को भी दोस्त बना लेता है।
आज मैं ट्रेन में सफ़र कर रहा था। सामने बैठी आंटी ने पूछा, “कहाँ के हो बेटा ?” मैंने कहा, “मेरी शादी हो गई है आंटी, अब मैं कहीं का नहीं रहा।” जब आदमी का समय खराब होता है, तो मुंगफलियाँ भी खाली निकलती है। सूरज शरीफ है, वो तो हमेशा पूर्व से ही निकलता है, परन्तु चाँद कभी दरवाज़े से, कभी खिड़की से और कभी ब्यूटी पार्लर से निकलता है। ठंड के मौसम में एक समस्या होती है। छाँव में बैठ जाओ तो ठंड लगती है। और धूप में बैठ जाओ तो मोबाईल का डिस्प्ले नहीं दिखता है। देखिए कबीर का एक मॉर्डन दोहा- “ऐसी वाणी बोलिए, जमकर झगड़ा होय, लेकिन उससे न बोलिए जो आपसे तगड़ा होय।” यदि इंसान अपनी गलतियों का वकील और दूसरों की गलती का जज बनेगा तो फैसले नहीं, फ़ासले होंगे।
आजकल आदमी-आदमी को काट रहा है, इसलिए बेचारे साँप बेरोजगार हो गए हैं। अब कुत्ता भी बिचारा क्या करे, तलवे अब आदमी चाटने लगे हैं। कभी-कभी मेरे दिल में एक ख्याल आता है कि दिमाग़ होने बाद भी दिल में ख्याल क्यों आता है? नींद भी क्या गजब की चीज है, आ जाए तो सब-कुछ भुला देती है और न आए तो सब-कुछ याद दिला देती है। नाराजगी की नजाकत देखिए-जिससे होती है, वह व्यक्ति दिल और दिमाग दोनों जगह ही छाया रहता है।
हम उनके प्यार में मर मिटे, परन्तु वो अंत तक नहीं पटे।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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