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मेरे जाने के बाद

श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
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मेरे चले जाने के बाद,
मेरा अस्तित्व भी मिट जाएगा,
मेरा सबकुछ मेरे
साथ चला जाएगा!!

ये सफ़र यूँ ही
चलता रहेगा,
इस भीड़ में कोई
हमारा नहीं रह जाएगा!!

जीवन भर अपना
व्यक्तित्व शून्य रखा था,
वो शून्य भी शून्य में
विलीन हो जाएगा!

ना किसी के पास फैलेगा
मेरी हंसी का धुंआ,
ना मेरी याद में कोई
एक दीपक जलायेगा!!

वो आंगन, वो किवाड़,
वो चूल्हा चौका जिनमे
हम प्यार परोसा करते थे,
उनकी सिसकियाँ
घर मे सुनाई देंगी!!

वो चूडी वो बिंदी,
कतार में सजी साडियाँ
उनके आँसू मेरी
अलमारी में दिखाई देंगे!!

प्रकृति को संजोया था
हमने जीवों की मुस्कराहट में,
वो अपने आसपास
हमें ढूंढा करेंगे!!

इनकी आवाज मुझ तक
भी पहुंच जाएगी,
जब हम इस दुनिया से
बहुत दूर निकल जाएगें!!

परिचय :- श्रीमती क्षिप्रा चतुर्वेदी
पति : श्री राकेश कुमार चतुर्वेदी
जन्म : २७ जुलाई १९६५ वाराणसी
शिक्षा : एम. ए., एम.फिल – समाजशास्त्र, पी.जी.डिप्लोमा (मानवाधिकार)
निवासी : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)
सम्मान : राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “जीवदया अंतर्राष्ट्रीय सम्मान २०२४” से सम्मानित
विशेष : साहित्यिक पुस्तकें पढ़ने के शौक ने लेखन की प्रेरणा दी और विगत ६-७ वर्षों से अपनी रचनाधर्मिता में संलग्न हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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