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कैसे-कैसे लोग जहाँ में आये हैं

विजय वर्धन
भागलपुर (बिहार)

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कैसे-कैसे लोग जहाँ में आये हैं
अपने फन से दुनिया को हर्षाये हैं
तुलसी ने मानस का वो उपहार दिया
जिससे भक्ति की वर्षा हम पाए हैं
नन्द विवेका ने दुनिया झकझोर दिया।
जिनके आगे मस्तक सब झुक जाये हैं
राणा, वीर शिवा ने घुटने नहीं टेकी
दुश्मन के छक्के हरदम छुड़वाये हैं
लता ने ऐसे-ऐसे गीतों को गया
कौन है जो उनको सुन झूम न पाए हैं
नन्दलाल के चित्र सदा ही बोल उठे
लगतें नहीं हैं चित्र, जिवंत हो आये हैं
मैथिली, दिनकर की कवितायेँ ऐसी हैं
अंतस्तल तक को झंकृत कर जाये हैं
स्वतंत्रता को लेने की खातिर कितने
लालों ने फाँसी पर प्राण गाँवाये हैं
किन-किन की चर्चा हम करें भंडार बहुत
उनके आगे सर हरदम झुक जाये हैं

परिचय :-  विजय वर्धन
पिता जी : स्व. हरिनंदन प्रसाद
माता जी : स्व. सरोजिनी देवी
निवासी : लहेरी टोला भागलपुर (बिहार)
शिक्षा : एम.एससी.बी.एड.
सम्प्रति : एस. बी. आई. से अवकाश प्राप्त
प्रकाशन : मेरा भारत कहाँ खो गया (कविता संग्रह), विभिन्न पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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