
डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
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ईमानदारी का महत्व इसी बात से समझ में आता है, कि जो व्यक्ति स्वयं गलत काम करता है, परंतु अपने नौकर से ईमानदारी की अपेक्षा करता है। वफादार सभी कोई चाहते हैं, परन्तु स्वयं कोई बनता नहीं चाहता। *हमारे देश में सरकारी अस्पताल का मतलब है- जान से हाथ धोना, और प्राईवेट अस्पताल का मतलब है-जायदाद से हाथ धोना, इसलिए समझदार बनिए और अपनी सेहत का ध्यान रखिए, ताकि आपको अस्पताल के चक्कर काटने पड़ें।* जो दूसरों को इज्जत देता होता है, असल में वो इज्जतदार होता है, क्योंकि इंसान दूसरों को वही दे पाता है, जो उसके पास होता है। *एक बात समझ से परे है कि 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर शराब के ठेके बंद रहते हैं और ३० जनवरी गांधी जी की मृत्यु के दिन शराब के ठेके खुले रहते हैं।* रुद्राक्ष हो या इंसान, एकमुखी बहुत कम ही मिलते हैं।
उपदेश और सलाह हमारे देश में मुफ्त में मिलने वाली २ चीजे हैं। *एक महिला ने डॉक्टर को बताया कि उसके पति नींद में बहुत बोलते हैं। इसके लिए मैं क्या करूँ ? डॉक्टर साहब ने सलाह दी-इसे आप दिन में बोलने का मौका दिया करें।* एक पत्नी ने पति से पूछा- तुम मुझसे कितना प्यार करते हो ? पति ने उत्तर दिया-शाहजहाँ जितना। पत्नी ने कहा- शाहजहाँ ने तो अपनी पत्नी की याद में ताजमहल बनवाया था, क्या तुम भी मेरी याद में ताजमहल बनवाओगे? पति ने कहा मैंने तो प्लाट भी ले लिया है, अब बस तुम्हारी तरफ से देर है। *गर्लफ्रेंड के साथ बैठ के जो कंकर मैंने झील में फेंके थे, शादी के बाद अब वो दाल में से निकल रहे हैं।*
नीम की कड़वाहट की हर व्यक्ति शिकायत करता है, परन्तु शराब उससे भी कड़वी होने के बाद भी व्यक्ति मजे से पीता है। *इंसान की यह आदत है, जिसको वह चाहता है उसमे बुराई नहीं देखता है और जिसको नहीं चाहता, उसकी अच्छाइयो को वहीं देखता।*
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*एक छोटे बच्चे ने अपनी दादी से पूछा- “दादी आप एक्टिंग करते हो क्या ?” दादी ने कहा- “नहीं बेटा।”
“तो मम्मी पड़ोस वाली आंटी से क्यों बोल रही थी, कि अब बुढ़िया आ गयी है, और रोज नाटक करेगी।” एक सर्वे के अनुसार दुनिया में केवल २ प्रतिशत लोग ही धूप से जलते हैं, बाकी तो बस एक-दूसरे से जलते रहते हैं। ध्यान दीजिए अगर आपका बेटा फोन पर हैलो-हैलो करते हुए कमरे से बाहर चला जाए तो समझ जाइए- यह फोन आपकी होने वाली बहू का है। आजकल युवा वर्ग में ‘बाबू’ शब्द का उपयोग बहुत बढ़ रहा है। यह शब्द नया नहीं है। यह शब्द पिछली सदी से चला आ रहा है “मेरा बाबू छैल-छबीला, मैं तो नाचूँगी।”
हमेशा अच्छा सोचें, क्योंकि सोच का प्रभाव मन पर होता है और मन का प्रभाव तन पर होता है एवं तन- मन दोनों का प्रभाव सारे जीवन पर होता है। इंसान की ख्वाहिशें कभी खत्म नहीं होती है। ज़िंदगी की बात तो छोड़िए, मरने के बाद भी स्वर्ग की ख्वाहिश रखता है। जिस महफिल में सज्जन लोग होते हैं, वहाँ संवाद होते हैं और जहां मूर्ख होते हैं, वहाँ विवाद ही होते हैं। *बजट में गरीबों को सब्सिडी मिली और अमीरों को रिबेट मिली। मध्यम वर्गीय झुनझुना बजाते ही रह गए।*
‘वैलेंटाइन डे’ आने वाला है, इसलिए इस बात को ध्यान में रखें। गर्लफ्रेंड की शादी किसी दूसरे से हो जाए तो हमें महीना-दो महीना दु:ख होता है, परन्तु जब हमारी शादी अपनी ही गर्लफ्रेण्ड से हो जाती है तो ज़िंदगीभर दुखी रहने के लिए तैयार रहिए। *पत्नी, पति से बोल रही थी कि “बचपन में मेरा एक ही शौक था- पति की खूब सेवा करूँगी।” पति-“फिर करती क्यों नहीं हो ?” तो पत्नी ने जवाब दिया- बचपन खत्म तो शौक भी खत्म।* विश्वास सब पर कीजिए, परंतु अंधविश्वास किसी पर मत कीजिए।
उड़ो आकाश में जरूर, मगर इतना ध्यान रहे,
शाम को इसी जमीन पर वापस आना है।
परिचय : डॉ. प्रताप मोहन “भारतीय”
निवासी : चिनार-२ ओमेक्स पार्क- वुड-बद्दी
घोषणा : मैं यह शपथ पूर्वक घोषणा करता हूँ कि उपरोक्त रचना पूर्णतः मौलिक है।
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