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मेरी मांँ

किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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मन की बातें किसे बताए
कौन है जो गले लगाये,
समझे जो कोई मेरी बातें,
वह तो मेरी माँ ही जाने।
दुख-दर्द, दुख-सुख को जो जाने,
मन के भाव को जो पहचाने,
प्यार और दुलार की जो है जननी।
संबंधो की जो है टहनी,
उज्जवल भविष्य की कामना जो करती,
निर्मल मन निर्मल है विचार,
संस्कार और संस्कृति का रखे जो ख्याल,
मान मर्यादा का जो पाठ पढाती,
बच्चों का रखती जो खयाल,
माँ तो माँ बस माँ होती है
चन्दा सी शीतल है मां ,सुरज
सा प्रकाश हे माँ
माँ तो बस माँ ही होती है।

परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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