मानवता बनाम युद्ध
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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मानवता और युद्ध
एक दूसरे के
विपरीत शब्द है
मानवता युद्ध में
समाप्त हो जाती है।
युद्ध में लाभ नहीं
हानि ही हानि है
प्रकृति की हानि
जनहानि आर्थिक हानि
मानवता की हानि।
युद्ध किसी विषय का
समाधान नहीं,
शांति और संवाद
युद्ध का परिणाम है,
मानसिक अशांति,
डर, द्वेष और
जन हानि यही
युद्ध के परिणाम है।
बम, गोला, बारूद,
मिसाइल, यह कोई
शांति के प्रतिक नहीं,
प्रेम भाईचारा आपसी
सौहार्द देश की उन्नति के
प्रतीक है नहीं युद्ध।
युद्ध से आर्थिक उन्नति
पीछे धकेल जाती है
जिससे गरीबी भुखमरी
उन्नति व्यापार सब चीज
पीछे रह जाती है।
आदमी जीने को
मजबूत हो जाता है।
गति प्रगति स्थित हो जाती है।
मानवता युद्ध का
परिणाम नहीं प्रेम का
विध्वंस है।
मानवता का अंत है।
प्रगति मै अवरोध है।
आर्थिक उन्नति का...

