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जोगिरा छंद (कबीर छंद)

शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
ग्वालियर (मध्यप्रदेश)

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जोगिरा छंद (कबीर छंद)

पवन फागुनी बहे सुहानी, मन में भरे उमंग।
झूम रही खिल के तरुणाई, घुली हवा में भंग।।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

आया फागुन लेकर खुशियाँ, मन में भरा उमंग।
ब्रज की होली देख सभी का, मनवा होता चंग।।
जोगिरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

गोप-गोपियाँ राधा रानी, कृष्ण कन्हैया संग।
भर पिचकारी रंग लगायें, बरसा प्रेमिल रंग।।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

बरसाने की मस्त गुजरियाॅं, ढूॅंढ रहीं गोपाल।
आज नहीं छोड़ें कान्हा को, रंग दें दोनों गाल।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

वृंदावन बरसाने देखो, मची हुई हैं धूम।
अद्भुत प्रेम समर्पण गाथा, हिय को लेती चूम।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

निर्मल मन से हम भी खेलें, होली सबके संग।
मानवता की भर पिचकारी, डालें सब पर रंग।।
जोगीरा सररर रा जोगीरा सररर रा…….

परिचय :- श्रीमती शिमला शर्मा “लक्ष्मी प्रिया”
निवासी : ग्वालियर (मध्यप्रदेश)
रुचि : गद्य/पद्म लेखन एवं गायन
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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