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लक्ष्मी सी मेरी पहचान

शशि चन्दन “निर्झर”
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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लक्ष्मी सी मेरी पहचान।
देता देव और इंसान।।
भ्रमित कर स्वयं को
हर लेता इक दिन प्राण।।

मेरी ही कोख से निकल….
पलता वो वक्ष स्थल से….
खोट भर नैनों में फिर…
दामन भरता अश्रुजल से।।

कभी अग्नि में स्वाह तो
कभी पत्थर होना पड़ा।।
कभी टुकड़े हुए हज़ार,
तो कभी बेघर होना पड़ा।।

क्रोध करूं या हास्य करूं।
या स्वयं का परिहास करूं।।
निर्णय तो करना होगा….
मौन रहूं या विनाश करूं।।

सोचती हूं उठा लूं कोरा कागज़,
दिखा दूं अपनी कलम की ताकत।
ताकि जन्में, जब-जब “कविता”..
“दिनकर” आकर छंदों से करें स्वागत।।

परिचय :- इंदौर (मध्य प्रदेश) की निवासी अपने शब्दों की निर्झर बरखा करने वाली शशि चन्दन एक ग्रहणी का दायित्व निभाते हुए अपने अनछुए अनसुलझे एहसासों को अपनी लेखनी के माध्यम से स्याह रंग कोरे कागज़ पर उतारतीं हैं, जो उन्हें खुशियों के आसमानी रंग देते हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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