
सुषमा शुक्ला
आबिदजान (अफ्रीका)
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सिलेंडर भैया आजकल बड़ी किल्लत मचाए,
रसोई में जैसे सन्नाटा सा छाए।
चूल्हे की हंसी अब कहीं खो सी गई,
बिना तुम्हारे रसोई भी रो सी गई।
भूखे से बर्तन खामोश पड़े हैं,
जैसे सब सपने कहीं दूर खड़े हैं।
आटे की लोई भी इंतजार में है,
तवा भी जैसे किसी पुकार में है।
रसोई की रानी अब उदास बैठी है,
आंच बिना हर खुशबू रूठी है।
चाय की चुस्की भी अधूरी लगती,
सुबह की रौनक भी फीकी सी लगती।
तुम बिन हर स्वाद अधूरा लगता,
हर पकवान अब बेसूरा लगता।
जल्दी आओ, रसोई में रंग भर दो,
हर चेहरे पर फिर से उमंग भर दो।
सिलेंडर भैया, अब देर न लगाओ,
रसोई की खुशियों को फिर से लौटाओl
परिचय :- सुषमा शुक्ला
जन्म : 25 अप्रैल
निवास : आबिदजान (अफ्रीका)
मूल निवासी : इंदौर (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एमए राजनीति शास्त्र बरकतुल्लाह भोपाल विश्वविद्यालय
लेखन विधा : कविता, हायकु, पिरामिड, लघु कथा
लेखन : लेखन के क्षेत्र में कोविद में जीवनसाथी की प्रेरणा से लेखन का कार्य शुरू किया। धर्म और संस्कृति इन मंचों पर काव्य गोश्तियां संचालन किया मनपसंद हास्य कला साहित्य मंच पर कम से कम १२५ बार संचालन किया,, और चार बार अध्यक्ष पद प्राप्त किया। इन सभी संस्थाओं से अब तक कुल मिलाकर १२५ सम्मान पत्र प्राप्त हुए।
विशेष : नाइजीरिया में, लागोस शहर में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार किया। अफ्रीका के आबिदजान शहर में हिंदी विश्व दिवस पर हिंदी के बावत भूषण और एक छोटी सी कविता पढ़ने का भारतीय दूतावास इंडियन एंबेसी में शुभ अवसर प्राप्त हुआ। तात्कालीन भारतीय राजदूत डॉक्टर राजेश रंजन के हाथों ससम्मान १०,००० सीफा राशि आबिदजान की मुद्रा, जिसे स्थानीय भाषा में सीफा कहा जाता है प्रदान की गई।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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