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उद्गम कहाँ

मालती खलतकर
इंदौर (मध्य प्रदेश)
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उथदी का उद्गम कहाँ
गिरि गवहर की
गहराई कहाँ तक
अथाह अन्तरिक्ष की
अन्तर सीमा कहाँ
कहाँ है गिरि पर खड़े
वृक्ष श्रृंगों की सीमा कहाँ
सरिता की जितनी
गहराई कौन जाने।
जल में अपने प्रतिबिम्ब
को निहारते रवि,
चन्द्र को कौन पकड़े
विद्युत की कडकती
आवाज को कैसे रोके
झुला-झुलते पवन के
वैग को कौन रोके।
कपसिले बादल के
टुकड़े के साथ
चांद का छुपना
निकलना कौन देखें
ओस बिन्दु का चमकना
वर्षा की रिमझिम
फुहारों में भिगना
कौन नहीं चाहता
रात्री में टिमटिमाते
जुगनुओं के समूहों
और आकाश में
चमकते तारे
एक ह पीत वर्ण,
एक रजत वर्ण
धन्य है प्रकृति हमारी
जो प्रतिदिन नित
नये खेल खेलती है
मानव खिलाडी है
निरन्तर चलता रहता है
इस जीवन के लिएं।

परिचय :- इंदौर निवासी मालती खलतकर आयु ६८ वर्ष है आपने हिंदी समाजशास्श्र में एम ए एल एलबी किया है आप हिंदी में कविता कहानी लेख गजल आदि लिखती हैं व आपकी रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं मैं प्रकाशित होते हैं आप सन १९६८ से इंदौर के लेखक संघ रचना संघ से जुड़ी आप शासकीय सेवा से निमृत हैं पीछेले ३० वर्षों से धार के कवियों के साथ शिरकत करती रही आकाशवाणी इंदौर से भी रचनाएं प्रसारित होती रहती हैं आप राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “हिंदी रक्षक राष्ट्रीय सम्मान २०२३” से सम्मानित हैं।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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