
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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यह कोई कहानी नहीं, सत्य घटना है। मेरे जीवन में ऐसी कई घटनाएं हुई जो हृदय को छू गई। कुछ सिखा दिया, कुछ अच्छा करवा दिया, ईश्वर कृपा रही है।
नवरात्रि की नवमी तिथि थी। मैं उस स्थान पर कुछ समय पहले ही रहने आई थी। मेरी एक परिचित को मैंने कहा कि कन्या भोजन के लिए तुम कन्याओं को बुला लाओ। उन्हीं कन्याओं में तीन बहनें थीं, उनकी मां उन्हें लेकर आई। मैंने कहा आप भी भोजन कर लें, वह बोली नहीं मां को हलवा का भोग लगाकर ही हमेशा पूजन करने के बाद व्रत खोलती हूं।
यह कहते-कहते उसकी आंखें भर आईं, मैंने पूछा तो आपने अभी तक भोग क्यूं नहीं लगाया, वह जो बोली उसे सुनकर मैंने अपने आपको मुश्किल से आंसू बहने से रोका था।
उसने कहा कि मेरे पति का एक्सीडेंट हो गया है। कमाई का साधन नहीं है। मेरे पास टंकी है, स्टोव है, पर पैसा नहीं कि मैं तेल लगाकर या गैस सिलेंडर भरवाकर हलवा बना लूं, और ना ही घर में आटा हैं। मैंने कहा आप अभी मैं पैसे दे रही हूं उससे तेल लाकर हलवा बना लें और भोग लगाकर भोजन प्रसादी यही करना। उसे दो किलो आटा भी दिया।
वह बोली पर यह तो मैं आपका कैसे लूं, मैं कैसे चुकाऊंगी। मैंने मेरी परिचित महिला से सब पूछ लिया था। मैंने कहा आप सिलाई कर लेती है तो काम मिल जाएगा। अभी फिलहाल आप को मैं साड़ी में एंब्रायडरी का काम दूंगी वह करके आप शुरू करिए।
वह प्रसन्न हो गयी, और मुझे जो संतोष उसे खुश देखकर मिला वह बहुत कीमती था। मैं भी संघर्ष ही कर रही थी। परंतु किसी को खुशियां देकर जो सुख मिलता है वह और भी जुझारू बना देता है। उसे एंब्रायडरी नहीं आती थी, पहले उसे सिखाया फिर उसने साड़ी बनाई। मेरे पास भोपाल खादी भंडार से कोसा सिल्क की साड़ियों पर एंब्रायडरी का काम करने के लिए कपड़ा आता था और मैं महिलाओं से बनवाकर भेजती थी।
फिर मैंने उसे कपड़े के बैग बनाना सिखाया और दुकानदार से बात करवाकर उसे रेग्युलर काम दिलवा दिया। वह बहुत खुश थी। कुछ दिनों बाद हम वहां से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। करीब पंद्रह वर्षों बाद वह मुझे रोड़ पर देखी और आवाज लगाई मैं पहचान नहीं पाई, फिर उसने कहा आंटी आपने मुझे बैग सिखाए थे, आज मेरा काम अच्छा चल रहा है। आप घर चलिए पास में ही है।
मैंने कहा फिर कभी आऊंगी। मैं बहुत जल्दी में थी। परंतु एक बार फिर खुशियों ने मन पर दस्तक दी। कहा कि यह सब तो उसकी श्रद्धा का ही फल है। मैं तो माध्यम बन गई। मां को कोटि-कोटि धन्यवाद दिया।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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