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Tag: आशा शर्मा

कृष्ण प्रेम और विश्वास
भजन

कृष्ण प्रेम और विश्वास

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हे कृष्ण तेरी पूजा, तन-मन से करती हूं। कुछ पास नहीं मेरा, बस नाम ही रखती हूं।।टेक।। सब अर्पण करती हूं, चरणों में तेरे माधव। जग भूला बिसरा सा, एक सपना सहती हूं। हे कृष्ण तेरी पूजा तन-मन से करती हूं।। तुम मात-पिता बंधु, और सखा हमारे हो। मत भूलो हमें जाना, तेरी याद में जीती हूं। हे कृष्ण तेरी पूजा तन-मन से करती हूं।। मन सूना-सूना है, संसार के सागर में। बस पार लगा देना, यही विनती करती हूं। हे कृष्ण तेरी पूजा तन-मन से करती हूं।। जब प्राण मेरा निकले, तुम सामने हो केशव। "आशा"है जीवन में, बस दीप ये रखती हूं। हे कृष्ण तेरी पूजा तन-मन से करती हूं।। कुछ पास नहीं मेरा, बस नाम ही रखती हूं।। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) ...
डाली गुड़िया
कविता

डाली गुड़िया

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** फूलों सी कोमल, नाजुक परी। हमारे घर आंगन में उतर आई है। आंखों में ढेर सारा प्यार, और होंठों पर मुस्कान लाई है। गुड़िया से खेलने को, वह गुड़िया संग लाई है। हल्के नीले रंग को लपेट कर, मानो नील गगन ने सजाया है। काली घटाओं से सुंदर केशों से, अभी-अभी शीतल वर्षा होगी। धरती पर प्रेम का बीजारोपण कर, प्यार सिखाने आई है। एक नन्ही परी हमारे आंगन में आई है। गुड़िया रानी फुलों को लेकर, सबको समझाने आई है ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, छल, कपटको पास मत आने दो। प्रेम से सभी का हृदय परिवर्तन करना सीखों। उसे‌ गोद में उठा लो, और संसार को प्रेम का संदेश बांटो। यही तो वह सभी को बताने आई है। एक प्यारी सी मीठी सी गुदगुदी हंसी से संदेश, सुनाने आई है। एक नन्ही सी परी हमारे आंगन में उतर आई है परिचय : आशा शर्मा पत...
नीला अंबर नीला समंदर
कविता

नीला अंबर नीला समंदर

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** अंबर को निहारते मैं खो गई। ईश्वर ने ऐसा विशाल बनाया, उसे सूर्य, चंद्र और तारों से सजाया। जगत पिता जैसे शिक्षा दे रहे, आकाश से अनंत विचारों को विस्तृत करो। समंदर को देखो, अथाह गहरा, परंतु अपने में, कितने ही अद्भुत जीवन समाये रखें। लहरें जब ऊंचाई को छूने लगे, उन्हें सीमा से बाहर न निकलें यह कहें। जैसे कह रहा हो कैसी भी हो, स्थिति, जीवन के क्रिया कलापों को सीमित सीमा में बांधे रखें। अंबर से विशालता और समंदर से गहराई सीखो। मन भंवरा है, उसे ईश्वर की कृतियों से प्रेरित होकर, सुंदर सुघढ़ भावों के संयम में रखना ही जीवनकी सुंदरता है। प्रकृति चित्रण कह रहा, अनंत, गहरे और संयमित रहो। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) सम्प्रति :...
मित्रता दिवस
कविता

मित्रता दिवस

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मित्रों का जीवन में क्या महत्व है। कोई सोचे तो सोचता रह जाता है। जो किसी से भी नहीं मिला, वो मित्र देता है। पैसा भौतिक सुख, और व्यापार देता है। संबंध सामाजिक प्रतिष्ठा, और सम्मान देते हैं। माता-पिता से अनोखा प्यार और स्नेह मिलता है। निस्वार्थ भाव का समर्पण, मात्र, माता-पिता ही देते हैं। पृथ्वी पर उनका स्थान, ईश्वर से भी अधिक मूल्यवान है। इसी प्रकार, एक सच्चे मित्र, का जीवन में होना, सुरक्षा कवच होता है। मित्रता पाना या देना, इस भाव से हटकर त्याग और समर्पण प्रदान करती हैं। संबंधों में एक मर्यादा होती है। परंतु मित्रता अपने मित्र के लिए हृदय से संबंध बनाकर जीती है। बिना कहे हृदय को स्पर्श कर, सुंदर स्वर्णिम भाव संजोती है। मित्रता में छल, कपट, और ईर्ष्या जैसे कलुषित भावों का कोई स्थान नही...
मन का सुकून
कविता

मन का सुकून

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मन तो दौड़ रहा था, जन्म से ही चहुं ओर कुछ रो रोकर खोज रहा था। कहां हूं मैं, कौन हूं, कैसे अपनी पहचान करुं। अलग-अलग हाथों जाकर, अस्तित्व को लेकर सोच रहा था। जब सभी हाथों से यात्रा कर, मां की गोद में आया। बड़े निश्छल और वात्सल्य भाव से, मां ने हृदय‌ से लगाया। सबने देखा तो समझ आया, सारी चंचलता गौण हो गई। रोने वाली आवाज सहसा, गहरी मुस्कान के साथ नींद में खो गई। सुकून का अर्थ है विश्वास, अब उस अबोध मन को, विश्वास हो गया। यही मेरी सुरक्षित थाती है। संसार क्षण-भंगुर है, पर मां की गोद और प्रेम अद्भुत सुकून दे जाती है। संसार में रहते हुए और, संसार से जाने के बाद भी, सुख-समृद्धि और आरोग्य का, आशीर्वाद लुटाती है। हर वस्तु पैसे से खरीदी जा सकती है। अहंकार को भौतिकता बढ़ाती है, मां तो बिना ...
मैंने ओढ़ी चदरिया हरि रंग की
भजन

मैंने ओढ़ी चदरिया हरि रंग की

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** मैंने ओढ़ी चदरिया हरि रंग की, मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी। सखी री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी। प्रेम को रंग, प्रीत की पाती, भक्ति गुलाल लगाओ नर नारी। हो... मै तो मन मंदिर को सजाऊंगी। सखी री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। ज्ञान शलाका अंजन भर-भर, डाल रहे गुरु, मिटा तिमिर सब। हो... मैं तो ज्ञान के दीप जलाऊंगी। सखी री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। काम, क्रोध, मद, लोभ लुटेरे, ये विवेक मानव का हर ले। हो... मै तो ज्ञान के तीर चलाऊंगी।। सखी री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। गुरु ही जग में "आशा" बंधावै, आत्मानंद का बोध करावै। हो... मैं तो "गुरु चरण कमल बलि जाऊंगी। सखी री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। मैंने ओढ़ी चदरिया हरि रंग की, मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। आली श्री मैं तो सतगुरु मिलन मनाऊंगी।। परि...
कठपुतली
आलेख

कठपुतली

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** कठपुतली एक कला है। काठ का अर्थ है लकड़ी, और पुतली अर्थात गुड़िया। पहले मनोरंजन केलिए कलाकार काठ की गुड़िया ऐसी बनाते कि उनके हाथ पैर सब हिला सकते थे और उनमें डोरियां बांधकर तमाशा दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया करते थे। कोई भी कहानी हो इन गुड़ियों के माध्यम से समझा दिया करते थे। जब सिनेमा का दौर आया तो यह कला छुप गयी। अब तो शोपीस की तरह घरों में इन्हें सजाया जाता है। बनाई तो आज भी जाती है, पर नचाई नहीं जाती है। कुछ निजी जीवन भी ऐसा ही है। पहले नारी शक्ति थी। मुगलों की संस्कृति का अनुसरण कर भारत में नारी को घर में बंद कर दिया गया। शिक्षा का अधिकार छीन लिया। पुरुष प्रधान समाज का निर्माण हुआ, नारी उसकी इच्छानुसार चलने वाली कठपुतली बन कर रह गई। आज जब उसे शिक्षा और सुरक्षा के मायने समझने लगे तो वह सारे बंधन तोड़ निरंकुश हो...
अंतर विश्वास
सत्यकथा

अंतर विश्वास

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जब सारे सहारे खत्म हो जाएंगे, तब ईश्वर का विश्वास ही सहारा देकर आगे बढ़ते रहने की शक्ति प्रदान करेगा। यह सत्य प्रमाणित है। इंदौर ऐसे ही बस बच्ची को लेने जाना था, उसका फ़ोन आया दादी मेरी परीक्षा हो गई है। मुझे लेने आ जाओ। मैं बिना पर्स चैक किए निकल गई, क्योंकि १००-५० रुपये तो पड़े ही रहते हैं। कहीं और कुछ काम था नहीं। बच्ची को लेकर रोड़ पर रिक्शा का रास्ता देख रही थी। एक वृद्ध दंपति आकर सामने खड़े हो गए, और कहा-हमें कुछ खाने को मिल सकता है क्या मेरे पति को मैं अस्पताल से छुट्टी दिलाकर लाई हूं, दवाई से पहले खाना जरुरी है। मेरे पास चार पांच चने के परांठे थे। बेटे ने रख दिए थे। मैंने देखा पैसे इतने नहीं कि दोनों का पेट भर जाए। मैंने कहा आप यह परांठे रखिए और इन्हें खिलाकर दवाई दीजियेगा। कुछ व्यवस्था आपकी करते हैं। वह कहने ल...
बेटा
कविता

बेटा

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बहुत ही अद्भुत और अलौकिक शक्ति है, मन के‌ अनकहे भावों की। बेटा हो या बेटी स्वर की महिमा है, माता -पिता की पुकार बेटा ही कहती। फिर क्यूं बेटी पराई कहलाई, जिसने दोनों परिवारों की शान बढ़ाई। बेटा सदैव ही घर का उजाला रहा है, परवरिश में भी उसका प्रथम अधिकार रहा है। बड़े बुजुर्ग भी बेटे को वंश की बेल कहते हैं, हर जगह पर आगे रखते हैं। धूम-धाम से विवाह किया, गृह लक्ष्मी के रूप में, बहू का गृहप्रवेश किया चार बर्तन घर में हो तो बजते ही है। कुछ बात हो भी जाए, तो सहन करते भी हैं। बेटा जब सक्षम होकर रोब दिखाता है, आंखों में जल भर जाता है। चुपके-चुपके आंखों को पोंछ लेते हैं, पर सभी के सामने, हंसकर रहते हैं। एक दिन बेटा भी चुपके-चुपके ले जाता है, वृद्ध आश्रम में छोड़कर आ जाता है। आपको यहां अप...
छाया वृक्ष की जड़ों से बंधी होती है
आलेख

छाया वृक्ष की जड़ों से बंधी होती है

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** हमारी परंपराएं हमारी जड़ हैं, और हमारे बुजुर्ग वो पेड़ हैं, जिनकी छत्रछाया में हमारे घर परिवार का सम्मान सुरक्षित है। आज इतनी उच्छृंखलता श्री पीढ़ी में देखने को मिलती है, उसका मूल कारण है कि, आज बुजुर्गों को बेकार सामान समझकर रातों उन्हें वृद्ध आश्रम भेज दिया जाता है, अथवा घर में कोई भी उनकी सलाह लेना आवश्यक नहीं समझता है बस एक गैरजरूरी सामान समझकर उनका अपमान किया जाता है। वे दुखी होकर चुपचाप बैठे रहते हैं और समझौता कर लेते हैं। नतीजा हमारे सामने है। माता पिता आधुनिकता की दौड़ में बच्चों को मंहगी शिक्षा तो दिलवा रहे हैं, परंतु मर्यादित जीवन जीने की और संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा जो केवल जो जी चुके है, जीवन को उन्हें ही पता है। वह शिक्षा नहीं देता रहे हैं। बच्चे भटक रहे हैं। मनमानी न होने पर जीवन तक समाप्त करने को ...
माता कैकेई – चरित्र वर्णन
आलेख

माता कैकेई – चरित्र वर्णन

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** सूक्ष्म परिचय- माता कैकेई कैकय देश की राजकुमारी थी। वे शास्त्र और शस्त्र विद्या में निपुण थीं। उन्हें राजनीति का भी सम्यक ज्ञान था। इसीलिए वे देवासुर संग्राम में राजा दशरथ की सारथी बनकर उनके साथ रहीं। जब महाराज दशरथ घायल हो गए, तो कुशल राजनीतिज्ञ की भांति उन्हें सुरक्षित बचाकर ले आई थी। एक युद्ध में रावण ने जब उनके रुप और सौंदर्य पर कटाक्ष किया तो, उन्होंने कहा कि इक्ष्वाकु वंश में जन्मा बालक ही तुझे मृत्यु की गोद में सुलाएगा। मेरा यह वचन है। तेरे समूल वंश को मिटा देगा और इस अपमान का जवाब तुझे अवश्य देगा। समय बीतता गया जब भगवान राम का अवतार हुआ कैकयी की प्रसन्नता का कोई ठिकाना नहीं था। वे जानती थी कि यह नारायण हैं। माता कौशल्या से भी अधिक प्रेम वे राम से करती थी। जब रामजी के राज तिलक की घोषणा हुई तो वे माता कैकेई स...
जय मां ज्वाला
भजन

जय मां ज्वाला

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** जग में कहां ऐसा, सबका नसीब है, ज्वाला के हाथों में, मेरी तक़दीर है।।टेक।। कांटों भरे हों चाहे, रास्ते हमारे, तोड़ के आएंगे, बंधन सारे। तेरी कृपा हो तो कांटा भी फूल है। ज्वाला के हाथों में मेरी तक़दीर है। कोटि जतन करें पापी हारें, भक्ति की ज्योत मैया जलती जाए। हारा है जीवन मैंने, यही मेरी जीत है। ज्वाला के हाथों में मेरी तक़दीर है। तेरे भवन में मैया, भक्त पुकारें, कष्ट निवारो मैया आए हैं द्वारे। आशाओं भरी है झोली, नैनों में नीर है। ज्वाला के हाथों में मेरी तक़दीर है। जग में कहां ऐसा किसका नसीब है। ज्वाला के हाथों में मेरी तक़दीर है। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल साहित्यिक परिचय ...
श्रद्धा
लघुकथा

श्रद्धा

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** यह कोई कहानी नहीं, सत्य घटना है। मेरे जीवन में ऐसी कई घटनाएं हुई जो हृदय को छू गई। कुछ सिखा दिया, कुछ अच्छा करवा दिया, ईश्वर कृपा रही है। नवरात्रि की नवमी तिथि थी। मैं उस स्थान पर कुछ समय पहले ही रहने आई थी। मेरी एक परिचित को मैंने कहा कि कन्या भोजन के लिए तुम कन्याओं को बुला लाओ। उन्हीं कन्याओं में तीन बहनें थीं, उनकी मां उन्हें लेकर आई। मैंने कहा आप भी भोजन कर लें, वह बोली नहीं मां को हलवा का भोग लगाकर ही हमेशा पूजन करने के बाद व्रत खोलती हूं। यह कहते-कहते उसकी आंखें भर आईं, मैंने पूछा तो आपने अभी तक भोग क्यूं नहीं लगाया, वह जो बोली उसे सुनकर मैंने अपने आपको मुश्किल से आंसू बहने से रोका था। उसने कहा कि मेरे पति का एक्सीडेंट हो गया है। कमाई का साधन नहीं है। मेरे पास टंकी है, स्टोव है, पर पैसा नहीं कि मैं तेल लगाकर य...
सूरज ठंडा  हो जाता है
कविता

सूरज ठंडा हो जाता है

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** बैसाख और ज्येष्ठ मास की तपन है। तन-मन झुलसे हुए, आकाश की ओर देख रहे हैं। पेड़-पौधों को, पशु-पक्षियों को, बादलों की प्रतीक्षा है। आषाढ़ मास आ गया है, बादलों ने आ आकर नर्तन किया है। कोई श्वेत, कोई मटमैले, कोई श्याम रंग में उमड़ रहे हैं। वायुमंडल में भी हलचल है, शीतल वायूके झोंको की राह सृष्टि तक रही है। सूर्य उदित है, पर प्रकाश धुंधला सा है, बादल गड़गड़ाहट के साथ संदेश दे रहे हैं। दामिनी ने चमक कर कहा, अब बरसों, तपन से सब झुलस रहा है। बूंद-बूंद गिरते-गिरते, मूसलधार बारिश होने लगी है। अब तो सृष्टि शीतलता से प्रसन्न हैं, क्यों कि सूरज भी जल से, मित्रता करके शीतल हो गया है। उदित भी है शीतल भी है, परंतु प्रसन्न भी है। शीतलता की आवश्यकता, सूरज को भी तो है, वहथक गया है। इसीलिए सूरज ठंडा हो गया है...
यह जगत है स्वार्थ का
हास्य

यह जगत है स्वार्थ का

आशा शर्मा धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश) ******************** यह जगत है स्वार्थ का, बना बनाया खेल। क्यों इसमें उलझा हुआ, सरपट चल रही रेल।। रिश्ते नाते अर्थ के, धन बिन सब बेकार। बेटा मांगे गाड़ी बंगला, मांगे भाई अधिकार।। पत्नी ने धीरे से कहा, सुनो मेरे भरतार। बेटे की भर दो तुम जेबें, दे दो भाई को घर बार।। चलो चलें हरि भजन को, वही करेंगे भव से पार। जो खेला हमने रचा, वो है झूठा संसार।। मिलता है, प्रभु शरण में, निश्छल प्रेम अपार। सत्य यही है कलियुग का, यहां चल कपट, व्यापार।। खेल रचाया था हमने, अब टूट गया भ्रम जाल। उलटे पैरों भाग लो, यही समय की है मांग।। प्रभु शरण हो जाओगे, है निश्चित कल्याण।। परिचय : आशा शर्मा पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश) सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल साहित्यिक पर...