
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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जब सारे सहारे खत्म हो जाएंगे, तब ईश्वर का विश्वास ही सहारा देकर आगे बढ़ते रहने की शक्ति प्रदान करेगा। यह सत्य प्रमाणित है। इंदौर ऐसे ही बस बच्ची को लेने जाना था, उसका फ़ोन आया दादी मेरी परीक्षा हो गई है। मुझे लेने आ जाओ। मैं बिना पर्स चैक किए निकल गई, क्योंकि १००-५० रुपये तो पड़े ही रहते हैं। कहीं और कुछ काम था नहीं। बच्ची को लेकर रोड़ पर रिक्शा का रास्ता देख रही थी। एक वृद्ध दंपति आकर सामने खड़े हो गए, और कहा-हमें कुछ खाने को मिल सकता है क्या मेरे पति को मैं अस्पताल से छुट्टी दिलाकर लाई हूं, दवाई से पहले खाना जरुरी है। मेरे पास चार पांच चने के परांठे थे। बेटे ने रख दिए थे। मैंने देखा पैसे इतने नहीं कि दोनों का पेट भर जाए। मैंने कहा आप यह परांठे रखिए और इन्हें खिलाकर दवाई दीजियेगा। कुछ व्यवस्था आपकी करते हैं।
वह कहने लगी बस दो ही दे दो इन्हें सादा भोजन देना है। मुझे चिंता हुई अब बस कि समय हो गया था। परंतु उनकी व्यवस्था भी करनी है। क्यों कि उन महिला ने बताया कि उन्हें गांव जाना है। इलाज में सारा पैसा जो लाए थे खत्म हो गया है। बस किराया बचा है। इसलिए पैदल ही बस स्टैंड चले जाएंगे। बस कुछ खाने की व्यवस्था हो जाए।
उसी समय निर्णय लिया, मैं दूसरी बस से चली जाऊंगी। बेटे को फोन लगाया और वहां आने को कहा, पास में ही भोजन थाली की दुकान पर उन्हें खाना खिलाया और बेटे से कहा इन्हें टिकट करवाकर गाड़ी में बैठा देना। उनके पास केवल पचास रुपए थे। किराया भी इतना ही था। यदि रास्ते में कोई आवश्यकता आ पड़ी तो क्या होगा। फिर घर आ तो गए पर उस महिला की विश्वास से भरी बातें गूंज उठी। उससे मैंने कहा आप यह परांठे भी रख लो और आपको भोजन करवा देते हैं। आगे कोई आवश्यकता आ जाए आप पैसे भी रखिए अपने पास, उसने बड़े विश्वास से कहा नहीं आगे वह ईश्वर कोई न कोई व्यवस्था कर ही देगा ।
अब जरुरत नहीं है तो क्यों रखूं। जैसे आपने सहायता की है, वह उसी ने तो भेजा है। नहीं तो हम दो घंटे से भटक रहे हैं। कौन किसकी मुसीबत को समझता है। आपका धन्यवाद आप ईश्वर की तरह आए और अब घर पहुंचा रहे हैं। वह सब में है, किसे किस रूप में मिलता है वहीं जाने। मैं भी मानती हूं, सचमुच विपत्ति में ईश्वर ही साथ होता है। मेरी कोई बड़ाई नहीं, जब कि मेरी जेब में तो इतने पैसे भी नहीं थे। मैं तो बस माध्यम बन गई थी। हे ईश्वर सभी पर कृपा बनाए रखें …।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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