
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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बहुत ही अद्भुत और
अलौकिक शक्ति है,
मन के अनकहे भावों की।
बेटा हो या बेटी
स्वर की महिमा है,
माता -पिता की पुकार
बेटा ही कहती।
फिर क्यूं बेटी पराई कहलाई,
जिसने दोनों परिवारों
की शान बढ़ाई।
बेटा सदैव ही घर का
उजाला रहा है,
परवरिश में भी उसका
प्रथम अधिकार रहा है।
बड़े बुजुर्ग भी बेटे को
वंश की बेल कहते हैं,
हर जगह पर आगे रखते हैं।
धूम-धाम से विवाह किया,
गृह लक्ष्मी के रूप में,
बहू का गृहप्रवेश किया
चार बर्तन घर में हो
तो बजते ही है।
कुछ बात हो भी जाए,
तो सहन करते भी हैं।
बेटा जब सक्षम होकर
रोब दिखाता है,
आंखों में जल भर जाता है।
चुपके-चुपके आंखों
को पोंछ लेते हैं,
पर सभी के सामने,
हंसकर रहते हैं।
एक दिन बेटा भी
चुपके-चुपके ले जाता है,
वृद्ध आश्रम में
छोड़कर आ जाता है।
आपको यहां अपनी
उम्र के लोग मिलेंगे,
यहां आप अधिक
खुश रहेंगे,
यह फैसला सुनाता है।
बेटी का जी भर आया,
उसने जब उन्हें
वृद्ध आश्रम में पाया।
बिना किसी लालच के,
उसे संतान का
कर्तव्य याद आया।
उन्हें घर ले आई,
फिर जीवन भर
सेवा के बदले में,
अनमोल निश्छल प्रेम और,
आशीर्वाद का
अनंत धन पाया।
मुझे अभी भी समझ
नहीं आता है।
फिर भी अंधा हो,
संसार बेटा पाने के लिए,
बेटी का अपमान
कैसे सह जाता है।।
बेटा और बेटी दोनों
परिवारों के फूल है।
उन्हें धन से नहीं
संस्कारों से सींचो,
और
हमारी संयुक्त परिवार की
संस्कृति की डोर से खींचो।
फिर कोई घर नहीं टूटेगा,
कोई बुजुर्ग वृद्ध आश्रम में
आंसू नहीं पोंछेगा।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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