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छाया वृक्ष की जड़ों से बंधी होती है

आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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हमारी परंपराएं हमारी जड़ हैं, और हमारे बुजुर्ग वो पेड़ हैं, जिनकी छत्रछाया में हमारे घर परिवार का सम्मान सुरक्षित है। आज इतनी उच्छृंखलता श्री पीढ़ी में देखने को मिलती है, उसका मूल कारण है कि, आज बुजुर्गों को बेकार सामान समझकर रातों उन्हें वृद्ध आश्रम भेज दिया जाता है, अथवा घर में कोई भी उनकी सलाह लेना आवश्यक नहीं समझता है बस एक गैरजरूरी सामान समझकर उनका अपमान किया जाता है।
वे दुखी होकर चुपचाप बैठे रहते हैं और समझौता कर लेते हैं।
नतीजा हमारे सामने है। माता पिता आधुनिकता की दौड़ में बच्चों को मंहगी शिक्षा तो दिलवा रहे हैं, परंतु मर्यादित जीवन जीने की और संस्कृति और संस्कारों की शिक्षा जो केवल जो जी चुके है, जीवन को उन्हें ही पता है। वह शिक्षा नहीं देता रहे हैं। बच्चे भटक रहे हैं। मनमानी न होने पर जीवन तक समाप्त करने को तेयार हो जाते हैं। फिर उस उच्चतम शिक्षा का क्या मोल है।जब तक हम हमारी जड़ें जहां मजबूत जमीन में अपना स्थान बनाए बैठी है, अर्थात जो हमारे बड़े बुजुर्ग है उनसे विचार विमर्श करके हमारी समस्या नहीं बताऐंगे ऐसे ही भटकते रहेंगे। यदि संसार के कड़वे सत्य अनुभवों से और क्षणिक दुखों से निकलने का सही तरीका कोई सुझाव सकता है, तो से हमारे बड़े बुजुर्ग है। जो सर पर हाथ रख दें तो सारी समस्याएं हल्की लगती है। और मन में आशा के दीपक जल उठते हैं। फिर कोई अपना जीवन समाप्त नहीं करता फिर से संस्कृति को स्थापित करें जड़ों से जुड़ कर रहें।

किसी कवि ने कहा है-
पंख मिल जाएं तो सपनों की उड़ान भरो,
पर पैर जमीन पर टिके रहने दो।
ताकि‌ पेड़ों की‌ छाया मिलती रहे।

परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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