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सच्ची इंसानियत

इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
गोरखाना, नोहर (राजस्थान)
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मानव सेवा सबसे बड़ी,
इससे बड़ा कोई धर्म नहीं।
दीन-दुखी का कष्ट हरे,1204
इससे बड़ा कोई कर्म नहीं।

इंसानियत को भूल जाए,
इससे बड़ा कोई जुर्म नहीं।
मानव बन जो संकट हरे,
उससे बड़ा कोई सुरम (श्रेष्ठ)नहीं।

मन में रखे न द्वेष-भाव,
इससे बड़ा कोई मर्म नहीं।
औरों के हित जो जिए,
इससे बड़ा कोई पर्व नहीं।

मिटा दे जो खुद का अहंकार,
इससे बड़ा कोई मार्ग नहीं।
बांटे जो जग में प्यार सदा,
उससे बड़ा कोई पुरुषार्थ नहीं।

परिचय :-  इंद्रजीत सिहाग “नोहरी”
उपनाम : “नोहरी”
पिताजी का नाम : श्री भानीराम सिहाग
माताजी का नाम : कांता देवी
अर्धांगिनी का नाम : माया देवी
जन्म दिनांक : १३/०७/१९९१
सम्प्रति : शिक्षक
शिक्षा : दो बार स्नातकोत्तर, बीएड
निवासी : गोरखाना तहसील नोहर ज़िला- हनुमानगढ़ (राजस्थान)
प्रकाशित रचनाएं : “समरसता के अग्रदूत” साझा काव्य संकलन मुख्य सम्पादक, “सृजन सागर के मोती” साझा काव्य संकलन उपसंपादक, “इंद्र का जाल” प्रकाशन ज़ारी… वर्तमान में विश्व हिंदी सृजन सागर मंच के बतौर अध्यक्ष
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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