
आशा शर्मा
धरमपुरी, इंदौर (मध्य प्रदेश)
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कठपुतली एक कला है।
काठ का अर्थ है लकड़ी, और पुतली अर्थात गुड़िया।
पहले मनोरंजन केलिए कलाकार काठ की गुड़िया ऐसी बनाते कि उनके हाथ पैर सब हिला सकते थे और उनमें डोरियां बांधकर तमाशा दिखाकर लोगों का मनोरंजन किया करते थे। कोई भी कहानी हो इन गुड़ियों के माध्यम से समझा दिया करते थे। जब सिनेमा का दौर आया तो यह कला छुप गयी। अब तो शोपीस की तरह घरों में इन्हें सजाया जाता है। बनाई तो आज भी जाती है, पर नचाई नहीं जाती है।
कुछ निजी जीवन भी ऐसा ही है। पहले नारी शक्ति थी। मुगलों की संस्कृति का अनुसरण कर भारत में नारी को घर में बंद कर दिया गया। शिक्षा का अधिकार छीन लिया। पुरुष प्रधान समाज का निर्माण हुआ, नारी उसकी इच्छानुसार चलने वाली कठपुतली बन कर रह गई। आज जब उसे शिक्षा और सुरक्षा के मायने समझने लगे तो वह सारे बंधन तोड़ निरंकुश हो गई। क्योंकि उसे जलाया गया, बेचा गया, सताया गया, यहां तक कि उसके जन्म पर भी प्रश्न उठाया गया है। यदि नारी लड़की को जन्म देती है तो उसे प्रताड़ित कर घर से बेकार वस्तु की तरह बाहर निकाल दिया गया।
आज नारी ने लड़की को जन्म देना ही उचित नहीं समझा क्यों कि वह मां है। आज चिल्लाने से क्या होगा। एक लड़की को भी लड़के की तरह ही जन्म लेने में पूरे नौ महीने लगते हैं। अब इंतजार करना होगा कि संतुलन कैसे बराबर हो सकता है। जब-जब संकट आया देवों ने मां को पुकारा है।
अब पुकार लगाई जाए और नारी को शक्ति स्वरूपा दुर्गा, काली, चामुंडा देवी जानकर ससम्मान आदर से समाज में स्थापित करो।
तभी एक मां अपनी नौ महीनों की गर्भस्थ कन्या संसार को सौंपने को तैयार होगी। जागो भारत जागो विश्व रचनाकार ईश्वर की सृष्टि के नियम तोड़ना नहीं चाहिए।
परिचय : आशा शर्मा
पति : श्रीहनुमान प्रसाद शर्मा
निवासी : धरमपुरी सांवेर रोड इंदौर (मध्य प्रदेश)
सम्प्रति : शिक्षिका हायरसैकैंडरी स्कूल
साहित्यिक परिचय : कविता, भजन, लघुकथा, लेख, आदि विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं। शिक्षण कार्य में निबंध लेखन किया है।
अन्य : विश्व रचनाकार मंच, शारदा साहित्य मंच, मनपसंद हास्य योग कला साहित्य मंच, शब्दसागर समूह, शुभ संकल्प समूह, आदि मंचों पर निरंतर लेखन कार्य। एवं पूर्व में आडियो कैसेट के लिए लेखन। अंतरराष्ट्रीय महिला प्रकोष्ठ अयोध्या मंच, पर संचालन, शुभ संकल्प समूह प्रकाशन से एवं अनेक मंचों से श्रेष्ठ लेखन के लिए सम्मानित।
प्रकाशन : “मैं कणिका मेरी कथा” आत्मकथा का प्रकाशन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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