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वीरांगना दुर्गावती

अर्चना अनुपम
जबलपुर मध्यप्रदेश
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चंदेलों की बेटी चण्डी,
गढ़-मण्डला की शान की..
चपल, सुंदरी, वीर-बांकुरी
दुर्गावती महान थी….

उसकी आँखों के अंगारे,
उसके तलवारों के स्वर..
प्राण बचाकर शत्रु भागे
हो समक्ष जो रानी गर…

योग्य चुनाव स्वयंवर से कर
दलपतशाह से ब्याह किया..
पति की सेवा बालक-पालन
कुशल नीति से राज किया..

५२ ताल बनाकर जनता
के जीवन अमृत बांटे..
मगर नीति की कौन कहे?
वीरों के भाग लिखे कांटे…

पति का शोक मनाए कैंसे?
कांधे थे दायित्व विकट …
बाजबहादुर आजम खान
सरीखे शत्रु जो मरकट..

स्त्री राज करे कैसे?
ये बात उसे ना हजम हुई…
चुभती मुगलों की आंखों में
रानी जैंसे कोई सुई……

हमला करने आते उल्टे
मुँह की ख़ाकर जाते थे..
दया-विनय कर जोड़ रानी से
अपनी जान बचाते थे..

बार-बार की हार से
बाजबहादुर स्वयं अचंभित था…
औरत होकर इतना साहस
इसी बात से चिंतित था….

मुगलों से जा मिला
गोंडवाना का शासक बनवादो
भारी कर भेजूंगा मुझको
राज बादशाह दिल वादो…..

अकबर हुआ निरुत्तर जग में
स्वयं कराकर निज उपहास..
रानी हेतु भेजी चौकी
उल्टे पाया रुई कपास…

शांत राज्य सम्पन्न प्रजा
उसकी आँखों को क्यों खटकी?
कैंसे हुआ महान रौंदने
की नीति मन में अटकी…

खीज पड़ा और भेजे सैनिक
रानी ने भी कमर कसी…
३००० मारे जब योद्धा
मुगलों की तब साख फसी…

पांच गुने सैनिक से लड़कर
वीरगति पा गए कई..
फिर भी साहस डिगा सके ना,
नीति बाँची एक नई…

बल को छोड़ा छल अपनाया
रानी से ना जीते जब ..
रक्त नेत्र में भरकर कूदी
खण्ड किये कई शत्रु तब…

मुंड काटती भाल भेदती
तीर-कमान कुशल जाने…
मृत्यु सम्मुख देख ना डरना
शिक्षा ऐंसी सिखलाने….

भेद गया चक्षु को तीर
फ़िर कहे! महावत सम्हालो
जीतेजी ना पाए शत्रु
लो कटार मुझको मारो..
जोड़ हांथ कप रहा महावत
तभी कटारी ले रानी
स्वयम को स्वयम सिद्ध किया
उनको वीरगति पानी…

भूल नहीं सकते हम रानी
कभी तुम्हारा ये बलिदान
सदा सर्वदा अमर रहोगी
रानी दुर्गावती महान …

परिचय :- अर्चना पाण्डेय गौतम
साहित्यिक उपनाम – अर्चना अनुपम “क्रान्ति”
मूल निवासी – जिला कटनी, (मध्य प्रदेश)
वर्तमान निवास – जबलपुर (मध्यप्रदेश)
शिक्षा – समाजशास्त्र विषय से स्नात्कोत्तर
सम्मान – जे.एम.डी. पब्लिकेशन द्वारा काव्य स्मृति सम्मान, विश्व हिन्दी लेखिका मंच द्वारा नारी चेतना की आवाज, श्रेष्ठ कवियित्री सम्मान, लक्ष्मी बाई मेमोरियल अवार्ड, एक्सीलेंट लेडी अवार्ड, विश्व हिन्दी रचनाकार मंच द्वारा – अटल काव्य स्मृति सम्मान, शहीद रत्न सम्मान, मोमसप्रेस्सो हिन्दी लेखक सम्मान २०१९, विश्व हिन्दी रचनाकार मंच से– गोल्डल पोयट्री अवॉर्ड २०२५
विधा – गद्य-पद्य
पुरस्कार : १४ सितम्बर २०२० हिन्दी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय हिन्दी रक्षक मंच (hindirakshak.com) इंदौर मध्य प्रदेश द्वारा अखिल भारतीय कविता सृजन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त।
भाषा – संस्कृत, हिन्दी भाषा की बुन्देली, बघेली, बृज, अवधि, भोजपुरी में समस्त रस-छंद अलंकार, नज़्म एवं ग़ज़ल हेतु उर्दू फ़ारसी भाषा के शब्द संयोजन।
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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