
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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एक दो माह पहले साधु संतों का आगमन अपनी कुटिया व आश्रम की देख रेख के लिए आना चालू हुआ उसमें जो बन सका हम दोनों ने मै और मेरे पतिदेव ने भोजन की सेवा दी अपने हाथों से भोजन बनाती और उन्हें पवाती मन को बहुत शकुन मिलता और आनंद का अनुभव प्राप्त होता और संत सेवा का अवसर हम जैसे तुच्छ प्राणी को मिला। सिहस्थ धीरे-धीरे चालू होना आरंभ हुआ और हम चैतन्य ग्रुप के सदस्य बने सिहस्थ के १५ दिन पहले से ही संतों का आगमन चालू हो गया। बड़े-बड़े जुलूस और पेशवाई निकलने लगी और संतो की अगवानी की व खूब नाच गाना किया फिर देखो साधु संत बहुत खुश, संतों ने खूब नोटों की बारिश की खूब मनमोहक दृश्य रहा यह नजारा हमारे संत नगर का रहा जो मेरे गुरु अवधेशानन्दजी की पेशवाई का था, जो आज भी नयनों के सामने आ जाता है।
खूब साधु संतों के दर्शन किए खूब पंडालो में दर्शन लाभ लिया। हमने अधिकांश सभी महापुरुषों के दर्शन किए साथ में अपनी ड्यूटी का भी फर्ज निभाया पति के दोस्त व उनकी मिसेज श्री मति सर्राफ भाभी दोनों साथ में दत्त अखाड़े पर ड्यूटी देते कभी पुलिस प्रशासन की भोजशाला में भी सेवा देते उन्हें खूब गरम-गरम खाना खिलाते खूब आनंद ही आनंद और पुण्य लाभ लिया। सिहस्थ में बड़े-बड़े पर्वों पर स्नान की परंपरा है जिसे शाही स्नान कहते हैं जिसमें साधु संत मां शिप्रा में स्नान के लिए अपने रथ घोड़े बग्गी हाथी पर सवार होकर आते हैं। हर स्नान पर हमने घाटों पर सेवा दी जिस दिन स्नान होता था शाम को ५:०० बजे घाटों पर हम अपनी ड्यूटी देते थे। घाटों को खाली करवाना भीड़ को डाइवर्ट करना फिर ८:०० बजे घाट पर हम जाकर बैठ जाते जब साधु संत स्नान के लिए आते अपने हाथी घोड़े बग्गी शस्त्र आदि लेकर अपनी जमात के साथ बहुत बड़ा जुलूस निकलता और फिर देखो दत्त अखाड़े पर नोटों की वर्षा जब संत हाथी पर सवार होते थे तो खूब नोटों की बारिश करते थे यह सब देखकर मन बहुत प्रसन्न हुआ क्या नजारा था रात के २ बजे का। फिर घाटों की सफाई हम सब सीढी पर बैठकर यह दृश्य देख रहे थे कहते हैं शाही स्नान में सभी देवी देवता कई रूप में आते है, जैसे हंस के जोड़े के रूप में रात को स्नान के लिए आते हैं देवता साधु के रूप में आते हैं। अमृत की वर्षा होती है।
करीबन रात की २:०० बजे होंगे हमने देखा कि एक संत छः ६:३० फुट के आते हैं सुनसान घाट कोई नहीं कमंडल रखते हैं और स्नान करते हैं मानो स्वयं “भोलेनाथ” स्नान के लिए आए हो, फिर वह कहां गए कोई पता नहीं, तभी दो हंसों के जोड़े आते हैं यह सब हम अपनी आंखों से देख रहे थे। मैंने अपने पतिदेव वह सभी साथियों को बोला देखो हंस आए हैं वह स्नान कर रहे हैं तभी कैमरामैन आते हैं और उस दृश्य को कैमरे में उतारते हैं और वह उड़ जाते हैं इस समय आकाश से बारिश की अमृत वर्षा होती है क्या दृश्य नयनाभीराम दृश्य देख कर हम अपने जीवन को धन्य-धन्य समझते हैं और ईश्वर का धन्यवाद देते हैं कि आपने हमें यह सब देखने का सौभाग्य दिया और हमारे मनुष्य जन्म को सार्थक किया वह दृश्य आज भी हमारी आंखों से कभी ओझल नहीं होता हमेशा याद ताजा बनी रहती है कोई हमारे किसी जन्म के पुण्य उदय हुए होंगे जो हमें यह सब दृश्य देखने को मिला मन इतना भर गया कि हमने २०१६ का जो सिहस्थ का नजारा देखा वह हम कभी नहीं भूल पाएंगे हमारा मनुष्य जन्म सार्थक हो गया। लिखने को तो बहुत है पर मैं उस दृश्य को मन मै नैनो मै रख सकती हूं पर उसका वर्णन करना मेरे लिए गागर में सागर भरने के समान है इतनी अस्मरणीय यादे रही हमारी २०१६ की ।
परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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