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कलयुगी रावण

किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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हम क्यों मारे उस रावण को?
कलयुग में रावण कम तो ना है,
बस एक भूल के कारण ही
युग-युग से मारते रावण है।
कलयुग में अत्याचार कम तो ना है
हम देख रहे हर गली मोहल्ले में,
रावण ने तो सीता का हरण किया
पर छुआ नहीं उस सीता को।
अब तो रावण कलयुग के
रेप बलात्कार अपहरण मर्डर
जैसे घोर पाप वह करते हैं,
फिर भी उन रावण को
क्यों छोड़ भला, हम
उस रावण को मरते हैं।
वह वीर पराक्रमी धर्मनिष्टर
वेदों का ज्ञाता संगीतज्ञ
वह ज्ञानी ध्यानी शिव भक्त,
फिर क्यों मारे उस रावण को,
जो देशद्रोही जो आतंकी जो
कपटी जो छलिया भी तो है।
जो सज्जनों पर अत्याचार करे
जो संतों का अपमान करे
जो शोषण अत्याचार करे
जो संतों का अपमान करे
इस रावण को क्यों ना मारे
हम उन दुष्टो का पृथ्वी
से भार उतारे हम।

परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।


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