
अंजनी कुमार चतुर्वेदी “श्रीकांत”
निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
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शरद पूर्णिमा धवल चाँदनी,
जब धरती पर आती।
पावन अमृत लिए साथ में,
मन का कमल खिलाती।
चलो करें इजहार प्यार का,
सहा नहीं अब जाता।
दिल दीवाना हुआ आपका,
गीत प्यार के गाता।
धवल चाँदनी छिटकी नभ में,
खुश हैं चाँद सितारे।
हैं अधीर लख चकवा-चकवी,
बिछड़ गए बेचारे।
चार दिनों का जीवन पाया,
पर गुमान में भूला।
समझ नहीं पाता जीवन को,
फिरता फूला-फूला।
शरद चाँद की मधुरिम किरणें,
अमृत बरसाती हैं।
मानव के सब रोग हटाकर,
मन को हरसाती हैं।
नहीं किया इजहार प्यार का,
नीरस जीवन जीता।
अमृत छोड़ बावरे तू क्यों,
काल कूट बिष पीता?
है अनमोल प्रेम जीवन में,
निष्ठुर तू क्या जाने?
करती प्यार बेतहाशा मैं,
भले नहीं तू माने।
शरद पूर्णिमा आई पावन,
तेरी याद सताती।
विरह वेदना अपने मन की,
मुख से कही न जाती।
धवल चाँदनी के आँचल में,
तुझ से प्यार करूँगी।
मधुर प्यार का साजन तुझसे,
मैं इजहार करूँगी।
फिर होगी बरसात अमिय की,
तन मन हरसाएगा।
सूख रही मन की बगिया को,
जब तू सरसाएगा।
परिचय :– अंजनी कुमार चतुर्वेदी “श्रीकांत”
निवासी : निवाड़ी (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.एस.सी एम.एड स्वर्ण पदक प्राप्त
सम्प्रति : वरिष्ठ व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक २ निवाड़ी
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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