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होली के रंग

ललित शर्मा
खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
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अजूबे होते है ये होली के रंग
लाल पीले नीले प्यारे-न्यारे,
ये होते प्रेम बरसाने के सुनहरे रंग।
रंग में होते अपने अपने मन पसंदीदा रंग
नीले पीले गुलाबी
मन को लुभाते रहते
होली के सुनहरे प्यारे न्यारे रंग।।

हरे-भरे उड़ाकर यत्र-तत्र रंग
सुनहरे सजाते माहौल होली के रंग।
मस्तमग्न सबको करते
केशरिया, लाल, पीले, हरे, नीले रंग
मौसमी गुलाबी बनकर होली के रंग।।

रंग की बरसात की बौछार में
प्यारे न्यारे दिखते ये रंग
गुलाबी आसमान बादल में ।
सुनहरा सुहावना चढ़ाते
मिश्रित होकर आनंदित
करते ये होली के रंग ।।

सुगंध में भरे होते होली के ये रंग
सुनहरा रूपरंग में अलबेले
बसन्त ऋतु पर खींचते ये रंग
कवि के मन में शब्द के रंग राग भरते
बेसुमार खुशियों में
होली की मस्तीभरे ये रंग

रंग में घुलने मिलने के फाल्गुन मौसम
करते है जब मिलकर होलिकादहन
रस्म निभाते ही होलिकादहन की
मन मस्ती पर उमंग तरंग
बरसते है ये होली के रंग
सबको लगते प्यारे-न्यारे
होली के प्यारे सुहाने रंग।

सतरंगी रंग से गोता लगाते रंग
रंग से भरते मस्ती भरते ये रंग
पिचकारियों के रंग
उड़ेलते, खुशियां में देते उमंग के रँग
बूढ़े या युवाओं पर नन्हे बच्चे
होली में अनेको रंगों में
खुशी में दिखते समान रंग

मस्ती फाग में सारे
भर भर पिचकारी मारे
बोली भाषा के प्रेम भाव की तरंगे
होली के रंग में सुहृदयता की
मधुरिम सुनहरी सुंदर छवि
अंकित करते होली के रंग

परिचय :- ललित शर्मा
निवासी : खलिहामारी, डिब्रूगढ़ (असम)
संप्रति : वरिष्ठ पत्रकार व लेखक
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।


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