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मेरी माँ

किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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आशा और विश्वास की,
गहराई और उडा़न की,
सोच और विचार की,
अच्छे और बुरे की एक
शुभ चिंतक होती है माँ।

खुशी और गम की,
आव और भाव की,
दर्शन और विज्ञान की
एक कला होती है माँ।

पथ और संचलन की,
निर्जन मन मै ज्ञान की,
अंधकार में प्रकाश की,
भटके को राह की एक
पथिक होती है माँ।

डुबते को सहारे की,
मेहनत और उत्साह की,
खुशियो के खजाने की,
आँसू को पी जाने की,
जीवन मे एक तरंग सी,
लहर होती है माँ,

नीरस मै रस की,
अमृत सा पान की,
एकान्त मै ध्यान की,
भक्ति और शक्ति की,
संस्कार और संस्कृति की
जननी होती है माँ।

समय के ज्ञान की,
साहस और विश्वास की,
साथ और विकास की
शक्ति होती है माँ ।

शान्ति और मंगल की,
प्रेम के प्रसाद की,
आनन्द और उमंग की
दरिया होती है माँ।

परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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