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नये साल में

प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
मंडला, (मध्य प्रदेश)
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सभी अधूरे सपने मेरे, पूरे होंगे नये साल में।
अरमानों में रंग भरेंगे, नहीं फंसेंगे मकड़ जाल में।।

अब तक जो भी रहे अधूरे, सपने वे मुस्काएंगे।
हमको देकर के खुशियाँ वे, मंज़िल आज सजाएंगे।।

नहीं निराशा संग रहेगी, मातम को दफनाएंगे।
कर्म करेंगे नये साल में, मंगल गीत सुनायेंगे।।

जाने वाले का वंदन कर, आगत को घर लाएँगे।
रहे अधूरे सपने अब तक, उनको अब महकाएँगे।।

जीवन में अब नव गति होगी, और सुहानी बातें।
सब कुछ अब मंगलमय होगा, सुखमय अब दिन-रातें।।

नहीं संग अवसाद रहेगा, नया वेग अब तन-मन में।
आने वाला काल सँजोये, नया नेग अब आँगन में।।

जीवन संकल्पित होकर के, नव अध्याय लिखेगा।
मुस्कानों का मौसम होगा, मातम नहीं दिखेगा।।

सभी अधूरे सपने आकर, वंदन नमन करेंगे।
पूरे करके “शरद” उन्हें हम, आगत चमन करेंगे।।

परिचय :- प्रो. डॉ. शरद नारायण खरे
जन्म : २५-०९-१९६१
निवासी : मंडला, (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : एम.ए (इतिहास) (मेरिट होल्डर), एल.एल.बी, पी-एच.डी. (इतिहास)
सम्प्रति : प्राध्यापक व विभागाध्यक्ष इतिहास/प्रभारी प्राचार्य शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय
प्रकाशित रचनाएं व गतिविधियां : पांच हज़ार से अधिक फुचकर रचनाएं प्रकाशित
प्रसारण : रेडियो, भोपाल दूरदर्शन, ज़ी-स्माइल, ज़ी टी.वी., स्टार टी.वी., ई.टी.वी., सब-टी.वी., साधना चैनल से प्रसारण।
संपादन : ९ कृतियों व ८ पत्रिकाओं/विशेषांकों का सम्पादन। एम.ए.इतिहास की पुस्तकों का लेखन
सम्मान/अलंकरण/ प्रशस्ति पत्र : देश के लगभग सभी राज्यों में ७०० से अधिक सारस्वत सम्मान/ अवार्ड/ अभिनंदन। म.प्र.साहित्य अकादमी का अखिल भारतीय माखनलाल चतुर्वेदी अवार्ड (५१०००/ रु.)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।

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