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विजय दिवस

मन्नत रंधावा
कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
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हर साल १६ दिसंबर को मनाया जाने वाला विजय दिवस, भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन है। यह १९७१ के भारत-पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र बलों की पाकिस्तान पर विजय का प्रतीक है। यह एक ऐतिहासिक संघर्ष था जिसने न केवल भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। यह दिन हमारे उन सैनिकों के बलिदान और वीरता का स्मरण करता है जिन्होंने आधुनिक इतिहास की सबसे निर्णायक विजयों में से एक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस युद्ध में ३० लाख से अधिक लोगों की जान गई और १०० लाख बांग्लादेशी निर्वासित हो गए।26 मार्च को बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, और इसी दिन से इस युद्ध की भयावहता शुरू हुई थी। लगभग नौ महीने बाद, १६ दिसंबर को, अंततः सब कुछ समाप्त हो गया। पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच इस दीर्घकालिक विवाद के राजनीतिक, भाषाई और आर्थिक कारण थे, जिनके चलते यह संघर्ष शुरू हुआ।
१९९९ में पाकिस्तान की सेना ने गुपचुप तरीके से जम्मू-कश्मीर के कारगिल सेक्टर की ऊंची चोटियों पर कब्जा कर लिया था. जब भारतीय सेना को यह जानकारी मिली, तो उन्होंने “ऑपरेशन विजय” शुरू किया. करीब ६० दिनों तक चले इस संघर्ष में भारत ने जीत हासिल की.
पश्चिमी पाकिस्तान की सेना की अपेक्षा के विपरीत, बंगाली सेना, प्रतिरोध समूहों और नागरिकों ने इसका विरोध किया। मुक्ति वाहिनी या मुक्ति सेना के नाम से प्रसिद्ध इस समूह ने पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
युद्ध शुरू होने के बाद पूर्व में तेज़ी से आगे बढ़ते हुए भारतीय सेना ने जेसोर और खुलना पर कब्ज़ा कर लिया। भारतीय सेना की रणनीति थी कि अहम ठिकानों को छोड़ते हुए पहले आगे बढ़ा जाए। युद्ध में मानेकशॉ खुलना और चटगांव पर ही कब्ज़ा करने पर ज़ोर देते रहे। ढाका पर कब्ज़ा करने का लक्ष्य भारतीय सेना के सामने रखा ही नहीं गया।
भारत के पास सिर्फ़ एक पर्वतीय डिवीजन था। इस डिवीजन के पास पुल बनाने की क्षमता नहीं थी। तब मानसून भी दस्तक देने ही वाला था। ऐसे समय में पूर्वी पाकिस्तान में प्रवेश करना मुसीबत मोल लेने जैसा था। मानेकशॉ ने सियासी दबाव में झुके बिना प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से स्पष्ट कह दिया कि वे पूरी तैयारी के साथ ही युद्ध के मैदान में उतरना चाहते हैं।
भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाकर दुश्मनों को हराया और टाइगर हिल, तोलोलिंग जैसी ऊंची पहाड़ियों पर फिर से कब्जा किया. यह दिन हमें देशभक्ति, साहस और बलिदान की भावना से प्रेरित करता है. कारगिल विजय दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि राष्ट्र के गौरव और सुरक्षा की प्रतीक है. हमें वीर जवानों का सम्मान करना चाहिए और उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए.
इतिहास के पन्नो में १६ दिसंबर की तारीख बहुत ही ज्यादा अहम है और इसका कारण है तीन देश भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश. १९७१ के भारत-पाक युद्धमें पाकिस्तानी सेना भारत के सामने हार गई थी १६ दिसंबर १९७१ को बांग्लादेश के ढाका में ९३,००० पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया था और इस युद्ध में भारत की एतिहासिक जीत हुई थी जिसके बाद पूर्वी पाकिस्तान
इसी प्रकार ऑपरेशन विजय में भारत को भी काफी क्षति हुई थी। लेकिन हमारे देश के जवानों ने हिम्मत नही हारी और अपनी जमीन फिर से लेकर ही माने।
वहीँ दुश्मन देश पाकिस्तान के ६००-७०० सैनिक मारे गए। इस युद्द में पाकिस्तान को हारता देख उसको सुलगाने वाला देश अमेरिका ने पाकिस्तान को वापस बुलाने का आदेश दिया, जिससे युद्धविराम हुआ। वरना भारतीय सेना के जवान बताते है की अगर यह युद्द कुछ ही दिन और जारी रहता तो शायद ही आज पाकिस्तान का नक्शा दुनिया को दिखाई देता। ध्यान रखें की “ऑपरेशन विजय” का आदर्श वाक्य – “जय माता दी!” था।
इस युद्द में परमवीर चक्र विजेता – कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव और लेफ्टिनेंट कर्नल विश्वनाथन (मरणोपरांत) सहित ४ परमवीर चक्र प्रदान किए गए थे।

परिचय :- मन्नत रंधावा
शिक्षा : ११वीं कक्षा की छात्रा राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां
निवासी : कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।

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