
किरण विजय पोरवाल
सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
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शोर्य वीरता स्वाभिमान है
वीर पराक्रमी योद्धा यहां,
चाहे रक्त बहा धर्मवीरों का
पर धर्म सनातन अमर यहाँ,
वार किया विध्वंस किया मूल
नाश किया उन आतताईयो ने,
मुगलों ने मंदिरो को तोड़े है पर
“आस्था” तोड़ न सके मन का।
मुगलों का आक्रमण झेला है,
कितने मंदिरों को तोड़ा है,
आखिर में हार गए पापी, पर
धर्म को सनातनियों ने नहीं छोड़ा है।
थे एकजुट हे एक लक्ष्य हे
मानवता हे प्रेम यहां,
हे वीर पराक्रमी योद्धा यहां,
हे देशभक्त हे संत यहां,
हे धर्म संस्कृति का पाठ यहां
हे तप तपस्या का भाव यहां,
हे ज्ञान का दीप, सहानुभूति यहां,
हे भाईचारे जैसे संबंध यहां।
चाहे साल शताब्दी संवत बीते,
नहीं मिटा सके कोई धर्म यहां,
रग रग कण-कण में व्याप्त यहां
हे परमेश्वर का हे वास यहां।
इसे मिटा नहीं सकता कोई मिट गए
यहां मिटाने वाले सदा,
यह शाश्वत, आदि अनन्त सदा,
पुरातन सनातन यह अनश्वर हे सदा।
अविनाशी अनंत हे नित्य सदा,
हे गीता का उपदेश यहां,
हे रामायण के राम यहां,
हे वेद पुराण का पाठ यहां,
हे उपनिषदों की वाणी यहां,
हे विष का पान करने वाले यहाँ,
विष को अमृत करने वाले है यहाँ,
हे परब्रह्म का वास यहां
हे सूर्य चंद्रमा साक्षी यहाँ,
शाश्वत पुरातन धर्म यहां,
यह है सनातन धर्म यहाँ।
धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो।
परिचय : किरण विजय पोरवाल
पति : विजय पोरवाल
निवासी : सांवेर रोड उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा : बी.कॉम इन कॉमर्स
व्यवसाय : बिजनेस वूमेन
विशिष्ट उपलब्धियां :
१. अंतर्राष्ट्रीय साहित्य मित्र मंडल जबलपुर से सम्मानित
२. अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन से सम्मानित
३. राष्ट्रीय हिंदी रक्षक मंच इंदौर द्वारा “साहित्य शिरोमणि अंतर्राष्ट्रीय समान २०२४” से सम्मानित
४. १५००+ कविताओं की रचना व भजनो की रचना
रूचि : कविता लेखन, चित्रकला, पॉटरी, मंडला आर्ट एवं संगीत
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करती हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना स्वरचित एवं मौलिक है।
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