
छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
आनंद विहार (दिल्ली)
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रिश्ते क्या है…?
और, इनकी अहमियत क्या है..?
रिश्तों में
अहसास होता है यथार्थ का
अनुभूति होती है अनुभव की
प्रतीति होती है प्रेम की
संवेदन होते हैं सेवा के….
रिश्तों में
आवेग होता है प्रीत का
उन्माद होता है सुश्रुषा का
आशा होती है कर्म की
अभिलाषा होती है अपनत्व की..
मगर….
रिश्ते खड़े हैं
निजी महत्वाकांक्षा के सहारे
आधार होता है अर्थ का
सोच मिली होती है स्वार्थ की
आवरण अवश्य है अपनेपन का…
रिश्तों में
तपिश है ईर्ष्या की
ज्वालामुखी है प्रतिशोध का
प्रकंपन है अविश्वास का
संवाद है वर्चस्व का…..
रिश्तों में
रिसता है छद्म अपनेपन का
विरोध खड़ा अपनों से अपनों का
अजीब सा अंत होता है सपनों का
अनुबंध है मिथ्या कथनों का..
ऐसे में..
अतीत भूल रहे हैं
वर्तमान भटक रहा है
भविष्य अंधकार में है
सहारे ढूंढते हैं रिश्तों में….
जर्जर हुये
रिश्तों के अस्थिपंजर
ढो रहे कँधों पर
कोई समझाये
रिश्ते क्या है
और.. रिश्तों की
अहमियत क्या है..?
परिचय :- छत्र छाजेड़ “फक्कड़”
निवासी : आनंद विहार, दिल्ली
विशेष रूचि : व्यंग्य लेखन, हिन्दी व राजस्थानी में पद्य व गद्य दोनों विधा में लेखन, अब तक पंद्रह पुस्तकों का प्रकाशन, पांच अनुवाद हिंदी से राजस्थानी में प्रकाशित, राजस्थान साहित्य अकादमी (राजस्थान सरकार) द्वारा, पत्र पत्रिकाओं व समाचार पत्रों में नियमित प्रकाशन, राजस्थानी लोक गीतों के लिए प्रसिद्ध कंपनी “वीणा कैसेटस” के दो एलबमों में सात गीत संगीतबद्ध हुये हैं।
सम्मान : “राजस्थानी आगीवान” सम्मान से सम्मानित
श्री गंगानगर के सृजन साहित्य संस्थान का सृजन साहित्य सम्मान व
सरदारशहर गौरव (साहित्य) सम्मान व अनेक अन्य सम्मानरा
घोषणा पत्र : मैं यह प्रमाणित करता हूँ कि सर्वाधिकार सुरक्षित मेरी यह रचना, स्वरचित एवं मौलिक है।
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